
बेमेतरा;हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” सेवा और पोषण का संकल्प के उद्देश्य के साथ 9वां राष्ट्रीय पोषण माह 2026 एवं 25 वर्ष सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ग्राम बेरलाकला, नेवनारा, चंडी एवं करेली,हसदा में आंगनवाड़ी उत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। इन कार्यक्रमों में जिला पंचायत अध्यक्ष कल्पना योगेश तिवारी शामिल हुईं और माताओं-बहनों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं से संवाद कर मातृ एवं शिशु पोषण के महत्व पर अपनी बात रखी। ओर साथ में खेलकूद,वाचन,गोद-भराई,रंगोली-प्रतियोगिता,मेहंदी प्रतियोगिता,कुर्सी दौड़, भी हुआ ।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि गांवों में आंगनवाड़ी केंद्र माताओं, बहनों और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी जागरूकता का महत्वपूर्ण केंद्र हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों के पोषण तथा परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ मां से स्वस्थ बच्चे और स्वस्थ परिवार का निर्माण होता है। स्वस्थ परिवार ही स्वस्थ समाज की नींव है। इसलिए गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म और उसके बाद तक मां एवं बच्चे के पोषण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज गर्भ में पल रहा बच्चा ही आने वाले भारत का भविष्य है, इसलिए उसके स्वस्थ एवं मजबूत विकास के लिए शुरुआत से ही उचित पोषण और देखभाल जरूरी है। श्रीमती कल्पना योगेश तिवारी ने माताओं-बहनों से आग्रह किया कि उन्हें मिलने वाली स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सहायता राशि और सुविधाओं का उपयोग अपने तथा अपने बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए करें। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्या होने पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं स्वास्थ्य कर्मियों से संपर्क करें और आवश्यक सलाह लें। उन्होंने स्थानीय एवं पौष्टिक आहार के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हमारे गांवों में ही कई ऐसे खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं, जो पोषण से भरपूर हैं। उन्होंने कहा कि “हमारे घर की रसोई में सिर्फ भोजन नहीं, पोषण भी पकना चाहिए।” घर की बाड़ी में उपलब्ध विभिन्न प्रकार की हरी भाजियां एवं स्थानीय सब्जियां परिवार के दैनिक भोजन में शामिल की जानी चाहिए। माताएं स्वयं भी पौष्टिक भोजन करें और अपने बच्चों एवं परिवार को भी पौष्टिक आहार दें। उन्होंने मुनगा (सहजन) के उपयोग को भी प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इसकी पत्तियां एवं फलियां भोजन में विभिन्न रूपों में शामिल की जा सकती हैं। स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों को अपनाकर परिवार के पोषण को बेहतर बनाया जा सकता है। इस अवसर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” केवल एक नारा नहीं, बल्कि बच्चों, माताओं और पूरे समाज के स्वस्थ भविष्य की जिम्मेदारी से जुड़ा संकल्प है। आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को घर-घर तक पहुंचाने में सभी की सहभागिता आवश्यक है।














