
रायपुर:दिल्ली से आए 43 इंफ्लुएंसर्स ने सुकमा से जगरगुंडा, केरलापेंदा और पूवर्ती तक पहुंचकर बस्तर के अतीत और बदलती परिस्थितियों को करीब से जाना।
सुकमा पुनर्वास केंद्र में उन्होंने मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सलियों से संवाद कर उनके अनुभवों को समझा। जगरगुंडा में 76 सीआरपीएफ जवानों की शहादत से जुड़े इतिहास को जाना, वहीं केरलापेंदा में ग्रामीणों से बातचीत कर क्षेत्र में आए बदलावों की जानकारी ली। यात्रा का भावनात्मक पड़ाव केरलापेंदा का श्रीराम मंदिर रहा, जहां करीब 21 वर्षों तक बंद रहने के बाद अप्रैल 2024 में फिर पूजा-अर्चना शुरू हुई। पूवर्ती में इंफ्लुएंसर्स ने नक्सली कमांडर हिडमा के परिजनों से भी मुलाकात कर गांव की वर्तमान परिस्थितियों को समझा।
यह यात्रा बस्तर में पुनर्वास, सुरक्षा, संवाद और विकास के प्रयासों के साथ सामान्य जनजीवन की वापसी की कहानियों को करीब से जानने का अवसर बनी।
सुशासन सरकार बस्तर में शांति, विश्वास और विकास को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।









