
Oplus_131072
रायपुर:राजधानी के श्री शंकराचार्य आश्रम में चल रहे चातुर्मास्य प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख डॉ स्वामी इंदुभवानन्द तीर्थ महाराज ने कहा कि गुरु के वचन सर्वदा कल्याणकारी होते हैं, किसी भी स्थिति में गुरु के वचनों का परि त्याग नहीं करना चाहिए। जिन लोगों ने गुरु के वचनों पर विचार नहीं किया उन्हें इस लोक में और परलोक में दोनों जगह दुःख ही दुःख प्राप्त होता है उन्हें सुख कदापि प्राप्त नहीं होता है।
उन्होंने कहा गुरुओं का वचन कभी भी किसी भी स्थिति में त्याज्य नहीं होता है। गुरु की आज्ञा में कदापि विचार नहीं किया जाता है जो गुरु आदेश कर दे! वही शास्त्र होता है और प्राणपण से उस वचन की रक्षा करना सनातनी व्यक्ति का दायित्व होता है इसलिए हे! सप्तर्षियों नारद जी का दिया हुआ उपदेश सत्य होगा वह मेरे गुरु हैं, उनका वचन कभी मिथ्या नहीं हो सकता है अतः आप मेरे गुरु की निंदा मत करें। भगवान शिव ही आकर यदि गुरु नारद के वचनों का परित्याग करने की बात करें तब भी मैं अपने गुरु नारद के वचनों का परित्याग नहीं करूंगी। उक्ताशय की बातें पराम्बा मां भगवती पार्वती सप्तर्षियों के परीक्षा लेने के प्रसंग में कह रही है। भगवान शिव के आदेश से सप्तऋषिगण तपस्या में संलग्न पार्वती की परीक्षा लेने के लिए गए थे। कथा के पूर्व समस्त शिव भक्तों ने शिव पुराण पोथी का पूजन किया तथा जगद्गुरु कुलम् के छात्रों ने मंगल श्लोकों का पाठ किया।









