
रायपुर :छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की तस्वीर अब केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह कौशल, तकनीक और रोजगार के नए आयाम गढ़ रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की मूल भावना को आत्मसात करते हुए राज्य सरकार उच्च शिक्षा के परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। उद्देश्य स्पष्ट है—युवाओं को केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, हुनरमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना। दूरस्थ अंचलों से लेकर बड़े शहरों के परिसरों तक, इस नई शैक्षणिक क्रांति की आहट साफ सुनी जा सकती है।
गुणवत्ता का ‘मिशन मोड’: सुदृढ़ मॉनिटरिंग और वित्तीय संबल
शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक और त्वरित सुधार लाने के लिए ‘छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन’ की नींव रखी गई है। इस मिशन के तहत राज्य के महाविद्यालयों का चयन कर प्रतिवर्ष उनके ढांचागत और शैक्षणिक उन्नयन के लिए विशेष राशि स्वीकृत की जाएगी। यह व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित न रहे, इसके लिए एक मजबूत मॉनिटरिंग तंत्र भी तैयार किया गया है, जो यह सुनिश्चित करेगा कि स्वीकृत बजट का लाभ सीधे विद्यार्थियों तक पहुँचे।
उत्कृष्टता का नया पता: 36 ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ महाविद्यालय
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप, राज्य के हर जिले में बहुसंकायी और अनुसंधान-केंद्रित शिक्षण संस्थानों की परिकल्पना को साकार किया जा रहा है। जिन महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या 3000 से अधिक है और जिनका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है, उन्हें ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जाएगा। ये 36 महाविद्यालय राज्य में शोध, नवाचार और उच्चस्तरीय अध्यापन के प्रमुख केंद्र बनकर उभरेंगे।








