
रायपुर:राजधानी के श्री शंकराचार्य आश्रम में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए सती मोह के प्रसंग में शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. स्वामी इंदु भवानंद तीर्थ महाराज ने कहा अनादर मृत्यु से बढ़कर होता है।
भगवान शंकर माता सती को समझाते हुए कह रहे हैं कि प्रिया सती! तुम्हारे पितादक्ष मुझे अपना द्रोही समझते हैं उन्होंने अपने यज्ञ में समस्त देवताओं को बुलाया है ब्रह्मा विष्णु महेश आदि देवता यज्ञ में सम्मिलित हुए हैं तथा ऋषिगण भी एवं एन या अ अभिमानी मूर्ख लोगों को भी तुम्हारे पिता ने यज्ञ में बुलाया किंतु मुझे नहीं बुलाया बिना बुलाए किसी के घर में जाना मृत्यु तुल्य कष्ट देने वाला होता है चाहे वह है इंद्र क्यों ना हो बिना बुलाए उसके घर भी नहीं जाना चाहिए बिना बुलाए किसी के घर में जाने से लघुता प्राप्त होती है, सम्मान नष्ट होता है इसलिए ऐसी यात्रा अनंत दुख देने वाली होती है इसलिए तुमको भी और मुझको दोनों को उस यज्ञ में सम्मिलित नहीं होना चाहिए। मनुष्य अपने शत्रुओं के बाणों से घायल होकर उतना पीड़ित नहीं होता है जितना अपने सगे संबंधियों की निंदा से पीड़ित होता है। हे प्रिय सज्जनों में रहने वाली विद्या, तप, धन, सुंदर शरीर, युवावस्था और उच्चकुल ये सत्पुरुषों के तो गुण हैं परंतु यही छः नीच पुरुष में जाने से अवगुण हो जाते है, इससे उनकी स्मृति नष्ट हो जाती हैं और वह सम्मानित व्यक्तियों का तेजस्वी व्यक्तियों का अपमान करने लगते है। तुम्हारे पिता दक्ष को उच्च पद मिलने से अभिमान हो गया है अतः यह यज्ञ मेरे अपमान के लिए उन्होंने प्रायोजित किया है अतः हमको और आपको इस यज्ञ में कतई नहीं जाना चाहिए। कथा के पूर्व समस्त शिव भक्तों ने भगवान शिव एवं शिव पुराण पोती का पूजन किया तथा जगत गुरुकुलम् के छात्रों ने वेद मन्त्रों का पाठ किया।









