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गरीबों के आवास छीनने वाले मोदी की पोल खुलने पर भाजपा तिलमिला रही:कांग्रेस

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रायपुर:। भाजपा के आरोप पर तीखा पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज  ने गरीबों के आवास छीनने वाले मोदी सरकार की पोल खोली तब भाजपा के नेता तिलमिला रहे हैं। कल तक जो भाजपा प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम से झूठ की राजनीती कर रहे थे। आज सच सामने आने से मुंह छिपा रहे हैं। यह सच है मोदी सरकार ने ही प्रदेश के लाखो गरीबों से उनका आवास छीना हैं। उनके स्वयं के घर के सपने को कुचला है। भाजपा के नेता मोदी की चाटुकारिता में  प्रदेश के गरीबों के साथ हुऐ  अन्याय अत्याचार पर भी मौन थे और मोदी के गुणगान करने के लिए राज्य सरकार पर झूठे आरोप लगा रहे थे। मुख्यमंत्री आवास न्याय योजना के तहत लाखों बेघर को घर दिया जा रहा है तब भाजपा नेता राजनीति कर रहे हैं असल मायने में भाजपा गरीब विरोधी है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा नेताओं को बताना चाहिए कि आखिर मोदी सरकार ने 2021-22 के लिए आवंटित ग्रामीण क्षेत्रों में 7,81,999 घरों के लक्ष्य को तत्काल प्रभाव से वापस लेकर गरीबों के साथ अन्याय क्यों किया?भाजपा के सांसदो ने गरीबो को उनका घर दिलाने केंद्र में प्रयास क्यों नही किया? मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गरीबो को आवास दिलाने प्रधानमंत्री को पत्र लिखे तो भाजपा सांसद मौन क्यों थे? 2022-23 में भी गरीबों को आवास नहीं दिया गया। भाजपा नेता प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम से सिर्फ राजनीति कर गरीबों को गुमराह कर रहे थे भरमा रहे थे और मोदी सरकार की गरीब विरोधी चरित्र पर पर्दा कर रहे थे।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा बताये जब प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत हुई तब भारत सरकार के सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना 2011 के अनुसार 1875585 ग्रामीण हितग्राही थे लेकिन उस दौरान रमन सरकार ने मात्र 2 लाख 18 हजार ग्रामीण मकान स्वीकृत क्यो किया? प्रदेश के 16 लाख 57 हजार 585 गरीबो को पीएम ग्रामीण आवास योजना से वंचित क्यो रखा? भूपेश सरकार में 1176146 ग्रामीण हितग्राहियों का आवास का सपना पूरा हुआ। इसमें 7 लाख और नये नाम जुड़ गये अब 18 लाख से अधिक लोगों को आवास मिल गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार में पौने 5 साल में ग्रामीण एवं शहरी मिलाकर 14 लाख 38 हजार 823 मकान स्वीकृत हुये जबकि रमन सरकार के दौरान पौने चार साल में ग्रामीण एवं शहरी मिलाकर मात्र 2 लाख 37 हजार मकान स्वीकृत हुआ था। प्रतिवर्ष के अनुसार देखा जाए तो भूपेश सरकार के पौने 5 साल में प्रति वर्ष 2 लाख 80 हजार मकान बने जबकि रमन सरकार के पौने चार साल में प्रति वर्ष मात्र 59 हजार मकान ही बने थे। भूपेश सरकार ने गरीबो के मकान बनाने अब ग्रामीण एवं शहरी मिलाकर 8489 करोड़ रुपया से अधिक की राशि जा रही कर चुके है। जबकि रमन सरकार के पौने चार साल में मात्र 272 करोड़ राज्यांश दिया गया था।

 

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