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बोला तो बोले कि क्या बोला!:(व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा)

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रायपुर:विरोधियों के कलेजे में कम–से–कम अब तो ठंडक पड़ गई होगी। मोदी जी ने अब तो मणिपुर पर बोलकर भी दिखा दिया। पट्ठों ने खुद बोल–बोलकर कान खा लिए थे कि मोदी जी का मुंह क्यों बंद है‚ मणिपुर का नाम उनकी जुबान पर ही क्यों नहीं आ रहा है। कुछ एंटीनेशनलों ने तो मोदी जी का ही नाम बदलकर‚ मौन मोदी करने की मांग करना भी शुरू कर दिया था। अब झेलेें‚ मोदी जी ने मुंह खोल दिया है। अब विरोधी किस मुंह से शिकायत कर रहे हैं कि एक कम अस्सी दिन के बाद बोला भी तो–मोदी जी ने ये क्या बोला?

पर मुंह खोलो–मुंह खोलो की जिद करने वालों को पहले ही सोचना चाहिए था कि मोदी जी मुंह खोलेंगे, तो क्या बोलेंगेॽ अब मोदी जी के इतने तो बुरे दिन भी नहीं आ गए हैं कि वह ऐसा कुछ बोलेंगे‚ जो विरोधियों को खुश कर सकता है। माना कि मणिपुर को भूलकर प्रचार में लगे रहे‚ फिर भी कर्नाटक चुनाव में बुरी तरह हार गए। माना कि 2024 का डर सता रहा है और डर के मारे ‘एक अकेले’ के रहते हुए भी‚ एनडीए वाला भूला हुआ झुंड याद आ रहा है। पर शेर भूखा हुआ तो क्या‚ घास थोड़े ही खाने लग जाएगा। फिर मोदी जी ने गलत भी क्या कहा हैॽ

बेशक‚ मणिपुर में जो हुआ‚ बहुत बुरा हुआ। पूरे देश को शर्मिदा करने वाला हुआ। दोषियों को मोदी जी माफ नहीं करेंगे। पर जो राजस्थान में वगैरह में हुआ‚ मोदी जी उसे भी कोई इसलिए माफ नहीं कर देंगे कि वहां‚ विरोधियों की सरकार है! राजा का समदर्शी होना जरूरी है। और मोदी जी का राज में तो वैसे भी‚ तुष्टीकरण तो किसी का भी नहीं होने वाला है। ट्विटर हो या विपक्षी सरकारें‚ किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

विरोधियों के कहने से मोदी जी ने मणिपुर पर मुंह खोल तो दिया‚ अब बीरेन सिंह के इस्तीफे की मांग बंद होनी चाहिए। अगर बीरेन सिंह का इस्तीफा चाहिए तो मध्य प्रदेश‚ उत्तर प्रदेश वगैरह न सही कम–से–कम राजस्थान‚ छत्तीसगढ़‚ बंगाल वगैरह की परायी सरकारों को भी इस्तीफा देना होगाॽ डबल इंजन वालों का इस्तीफा‚ हलुआ समझा है क्याॽ

*(व्यंग्यकार वरिष्ठ पत्रकार और साप्ताहिक ‘लोकलहर’ के संपादक हैं।)*

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