
रायपुर: छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा प्रदेश के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। ‘वसुंधरा’ (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों और तहसीलों के पुराने एवं वर्तमान राजस्व अभिलेखों का संपूर्ण डिजिटलीकरण, संरक्षण तथा प्रमाणीकरण किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में ‘वसुंधरा परियोजना’ के तहत राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, जिससे खसरा, बी-1 और ऋण पुस्तिका जैसे भूमि दस्तावेज कुछ ही सेकंड में व्हाट्सएप और ऑनलाइन माध्यमों से सुरक्षित व पारदर्शी रूप से नागरिकों को मिल रहे हैं।
दंतेवाड़ा का सफल मॉडल बना प्रेरणा
इस महत्वाकांक्षी योजना की नींव दंतेवाड़ा जिले में सफलतापूर्वक क्रियान्वित किए गए मॉडल पर रखी गई है। दंतेवाड़ा में पिछले एक वर्ष के दौरान 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया और 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र मात्र एक से दो दिनों में जारी किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निराकरण संभव हुआ और अभिलेखों में छेड़छाड़ का एक भी मामला सामने नहीं आया।
12.89 करोड़ पृष्ठों के डिजिटलीकरण का विशाल लक्ष्य
दंतेवाड़ा के इसी सफल प्रयोग के आधार पर अब पूरे राज्य में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के विभिन्न राजस्व अभिलेखों को डिजिटाइज़ करने का विस्तृत खाका तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत 22.72 करोड़ रुपए की लागत से 5.68 करोड़ पृष्ठ खसरा पांचसाला, 11.77 करोड़ रुपए की लागत से 2.94 करोड़ पृष्ठ B-1 रिकॉर्ड, 9.98 करोड़ रुपए की लागत से 2.49 करोड़ पृष्ठ नामांतरण व संशोधन पंजी, 2.13 करोड़ रुपए की लागत से 53.16 लाख पृष्ठ मिसल पंजी और 1.89 करोड़ रुपए की लागत से 47.29 लाख पृष्ठ अधिकार अभिलेख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा, नजूल शीट एवं व्यवर्तन पंजी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा।







