
दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप को पद से हटा दिया गया है। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को आदेश (क्रमांक ESTB/19857/2026/38-2) जारी कर उन्हें उच्च शिक्षा संचालनालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर भेज दिया है। उनकी जगह शासकीय वी.वाय.टी. महाविद्यालय, दुर्ग में इतिहास के प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पांडेय को विश्वविद्यालय का प्रभारी कुलसचिव बनाया गया है। आदेश पर राज्यपाल के नाम से अवर सचिव फबिओला बड़ा के डिजिटल हस्ताक्षर हैं। आदेश में लिखा है कि इस पर समन्वय में अनुमोदन मिल चुका है।
शासन के आदेश में तबादले की कोई वजह नहीं बताई गई है। लेकिन यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पिछले कुछ महीनों से कुलसचिव पर लगे कई आरोपों को लेकर विश्वविद्यालय में चर्चा चल रही थी। 3 अगस्त को कुलदीप पर बीएनएसएस की धारा 316(4) के तहत वित्तीय अनियमितता और शासकीय राशि के गबन के मामले में मोहननगर थाना में FIR दर्ज की गयी थीविश्वविद्यालय अधिनियम तथा शासन के नियमानुसार वितीय अनियमतताओं में लिप्त होने पर स्वतंत्र प्रभार नहीं दिया जाता अतः भूपेंद्र कुलदीप उच्च शिक्षा संचालनालय मे अटैच किया गया हैमहिला कर्मचारी के वेतन का 84% रकम बेटे के खाते में ट्रांसफर करवाने का
सबसे गंभीर आरोप विश्वविद्यालय की एक अर्धकुशल दैनिक वेतनभोगी महिला कर्मचारी ने लगाया है। उनकी शिकायत है कि उनसे दफ्तर के बजाय कुलसचिव के घर पर खाना बनाने जैसे घरेलू काम कराए गए। शिकायत के मुताबिक उनका लगभग 11,500 रुपये मासिक वेतन खाते में आने के एक से तीन दिन के भीतर, नौकरी से निकाले जाने के डर से, UPI/PhonePe से कुलसचिव के बेटे के खाते में भेजवा लिया जाता था। उनके पास हर महीने सिर्फ़ करीब 2,200 रुपये बचते थे।
शिकायत की जाँच के लिए अधिष्ठाता छात्र कल्याण की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति बनाई गई। समिति ने बैंक पासबुक और लेनदेन के रिकॉर्ड का महीनेवार मिलान किया। उसकी रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच कर्मचारी को लगभग 1,77,137 रुपये का भुगतान हुआ। इसमें से करीब 1,49,384 रुपये, यानी लगभग 84.3%, कथित रूप से कुलसचिव के बेटे के खाते में गए। समिति को सभी 17 महीनों की प्रविष्टियों में यही मिलान मिला और उसने इसे “सुनियोजित और आवर्ती पैटर्न” बताया। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस उप महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज को पत्र लिखा। पत्र में FIR दर्ज कर जाँच करने, शिकायतकर्ता को सुरक्षा देने, कुलसचिव के खिलाफ विभागीय जाँच करने और रकम वापस दिलाने की माँग की गई है। पत्र की प्रतिलिपि EOW/ACB और उच्च शिक्षा विभाग को भी भेजी गई है। समिति ने साफ़ कहा है कि वह दोष तय करने वाली सक्षम प्राधिकारी नहीं है।
सरकारी कार की मरम्मत के 24 हजार रुपये पर सवाल
कुलसचिव को दी गई सरकारी इटियोस कार (CG 02 6681) फरवरी 2026 में क्षतिग्रस्त हुई थी। मामला फाइल पर आने पर कुलपति ने FIR कराने और बीमा क्लेम करने को लिखा था। आरोप है कि न FIR हुई, न बीमा क्लेम हुआ। कार की मरम्मत वाहन प्रकोष्ठ के बजाय निजी तौर पर कराई गई और 24,000 रुपये बिना प्रशासकीय स्वीकृति के विश्वविद्यालय के खाते से निकाल लिए गए। कुलपति ने वित्त विभाग से इस भुगतान की जानकारी माँगी है। यह भी कहा जा रहा है कि विश्वविद्यालय अधिनियम में कुलसचिव को केवल पूल कार की पात्रता है।
शासन द्वारा की गयी जांच मे श्री कुलदीप को दोषी पाया गया तथा अनुशासनात्मक कार्यवाही चल रही है ।
श्री भूपेंद्र कुलदीप का फर्जी PhD का प्रकरण भी जांच के दायरे मे है । इसकी
जाँच जारी है
अन्य मामले फिलहाल जाँच और स्पष्टीकरण के दौर में हैं और किसी आरोप पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
एसएफआई ने भूपेंद्र कुलदीप के फर्जी पीएचडी, गलत दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति, तथा कार के मरम्मत में भ्रष्टाचार के मामले को सबसे पहले उजागर किया था तथा 30 मार्च को एस एफ आई रायपुर जिला अध्यक्ष गर्व गभने, जिला सचिव हर्ष संघाणी, उपाध्यक्ष अल्पिका कन्नौजे और अथर्व अवस्थी ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा था एसएफआई की शिकायत पर ही कुलसचिव के खिलाफ जांच के लिए जांच समिति गठित ही थी तथा जांच समिति ने सभी आरोपों को सही पाया कुलसचिव पर कार्यवाही की मांग को लेकर एस एफ आई ने लगातार शिक्षा सचिव और आयुक्त उच्च शिक्षा को ज्ञापन सौंपा था तथा सोशल मीडिया और अखबारों बयान जारी कर लगातार दबाव बनाया था







