रायपुर:डूण्डा कौशल्या माता बिहार में साहू परिवार एवं समाज की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह में अंतिम दिन की कथा पर प्रकाश डालते हुए श्री शंकराचार्य आश्रम रायपुर के प्रमुख डॉ. इन्दुभवानन्द महाराज ने बताया कि जन्म मृत्यु शरीर और संसार की होती है आत्मा की जन्म मृत्यु नहीं होती है आत्मा आवागमन से रहित है। “मैं मरूंगा” ये पशु बुद्धि है, तुम पशु बुद्धि का त्याग करो तुम ना तो कभी पैदा हुए हो और न कभी तुम्हारी मृत्यु होगी। जन्म और मृत्यु देह की होती है ,तुम तो साक्षात ब्रह्म हो। अपने ब्रह्मपना का अनुभव करो। वास्तव में मन ही वासना विशिष्ट सूक्ष्म शरीर की सृष्टि कर लेता है और उस शरीर में “मैं बुद्धि” हो जाने से आत्मा फॅस जाता है। स्वयं प्रकाश आत्मा का आना-जाना कुछ नहीं होता है वह तो आकाश के समान सबका आधार एवं अनंत है। परीक्षित तुम अपने हृदय में विद्यमान आत्मा के बारे में स्वयं विचार करो ब्राह्मण की आज्ञा से तक्षक तुमको भस्म नहीं करेगा मृत्यु भी तुमको भस्म नहीं करेगी तुम स्वयं मृत्यु के भी मृत्यु हो तुम्हें कोई मार नहीं सकता है ऐसा मन में अनुसंधान करो। इसके पूर्व सुधि वक्ता ने अंतिम दिन की शेष कथाओं पर भी प्रकाश डाला। कथा के पूर्व यजमान सुंदरलाल साहू एवं उनके परिवार ने भागवत ग्रंथ की पूजन कर आरती उतारी।

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