
रायपुर:राजधानी के श्री शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम में श्री शिव पुराण की दिव्य अमृतमयी कथा को सुनाते हुए व्यास गद्दी की आसंदी में विराजमान डॉ.इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने बताया कि भगवान शिव के पूजन से बंधन से मुक्ति प्राप्त होती है। भगवान शिव का पूजन विभिन्न उपचारों से किया जाता है किंतु भगवान शिव को जलधारा अत्यंत प्रिय है।
उन्होंने कहा *जलधारा शिव प्रिया* अर्थात् अभिषेक करने से भगवान शंकर अत्यंत प्रसन्न होते हैं विभिन्न प्रकार की कामनाओं को लक्षित करके अभिषेक किया जाता है जिसकी जो भी कामना होती है भगवान शिव की कृपा से अभिषेक करने से अवश्य पूर्ण होती है।जिनको संतान की प्राप्ति अपेक्षित है ऐसे दंपति को दूध की धारा से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। दूध की धारा से किया गया अभिषेक उनको शीघ्र संतान देने वाला होताहै, जिनको धन की इच्छा होती है धन की इच्छा पूर्ति करने के लिए उनको गन्ने के रस से अभिषेक करना चाहिए। घृत से अभिषेक करने से वंश की वृद्धि होती है दूध में चीनी मिलाकर जब अभिषेक किया जाता है तो बुद्धि की जडता समाप्त हो जाती है, और सरसों के तेल से अभिषेक करने से शत्रु बाधा नष्ट हो जाती हैऔर मुक्ति की कामना के लिए तीर्थ के जल से अभिषेक करने से मुक्ति की कामना प्राप्त हो जाती है। समस्त पृथ्वी सोना और औषधि दान करने का जो पुण्य प्राप्त होता है वह पुण्य अभिषेक करने से ही प्राप्त हो जाता जो भगवान शिव का अभिषेक करता है उसमें और शिव में कहीं कोई भेद नहीं रहता है। वह साक्षात शिव के स्वरूप को ही प्राप्त कर लेता है। कथा के पूर्व समस्त शिव भक्तों ने भगवान शंकर की पोती का पूजन कर आरती की तथा संस्कृत विद्यालय के छात्रों ने मंगल श्लोक का पाठ किया।










