
रायपुर। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि सांसद विधायक महापौर पार्षद भारतीय जनता पार्टी के लेकिन सारे के सारे नदारत है बीजेपी राज में लोगों के जान की कोई कीमत नहीं रह गई है आवारा मवेशियों के आतंक से शहर सहमा हुआ है, शहर की सड़कों पर आवारा पशुओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है और आम जनता अपनी जान हथेली पर लेकर सड़कों पर चलने को मजबूर है। मुख्य मार्ग हों या गली-मोहल्ले, जगह-जगह सड़कों पर बैठे पशु कभी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हैं। कल जिस प्रकार दीनदयाल उपाध्याय नगर में एक बुजुर्ग व्यक्ति बी एन शर्मा और उनके 11 महीने के नाती को सांड ने बुरी तरह ज़ख्मी किया और इनके साथ लगभग 15 लोगों को भी घायल किया पर सरकार की तरफ से कोई सुन्ध लेने वाला नहीं आया घायलों में एक प्रेग्नेंट महिला भी शामिल है और पूर्व महिला कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमति कल्पना पटेल भी हैं जो बाला जी हॉस्पिटल में एडमिट है।
विकास उपाध्याय ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब सड़कों पर नागरिकों को सुरक्षित चलने का अधिकार नहीं मिल रहा, तब नगर निगम की व्यवस्थाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आवारा पशुओं की समस्या आज इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोगों में सड़क पर निकलने तक का डर पैदा हो गया है।
उन्होंने कहा कि कागजों में अभियान चलाने और फोटो खिंचवाने से जनता की जान नहीं बचेगी। यदि व्यवस्था वास्तव में सक्रिय है तो फिर सड़कों पर आवारा पशुओं का जमावड़ा क्यों दिखाई दे रहा है? जिम्मेदार अधिकारी यह स्पष्ट करें कि अब तक कितने पशुओं को हटाया गया और समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कार्रवाई की गई।
विकास उपाध्याय ने कहा कि पूर्व की कांग्रेस सरकार में गौठान इसीलिये बनाए गए थे ताकि गौ माता और मवेशियों को आहार मिल सके और उनका ईलाज हो सके लेकिन बीजेपी सरकार ने इसको बंद करके लोगों की जान को जोखिम में डाल दिया है।
विकास उपाध्याय ने कहा कि जनता की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नगर निगम तत्काल विशेष अभियान चलाकर शहर की सड़कों को आवारा पशुओं से मुक्त करे और दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस एवं स्थायी व्यवस्था लागू करे।
उपाध्याय ने बीजेपी सरकार सहित रायपुर नगर निगम से पीड़ितों को उचित मुआवजा और फ्री ईलाज की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जिम्मेदार विभाग अब भी नहीं जागे तो जनता की सुरक्षा के इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर संबंधित अधिकारियों के कार्यालय तक आवाज बुलंद की जाएगी। प्रशासन को समझना होगा कि यह महज अव्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है।









