
नारायणपुर: जिले के भाटपाल में करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का ठिकाना रहा परिसर अब विद्यार्थियों की पढ़ाई और आवास का केंद्र बन गया है। कभी क्षेत्र में सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करने वाला यह परिसर आज दूरस्थ गांवों के बच्चों को विद्यालय के समीप रहकर पढ़ाई जारी रखने का अवसर दे रहा है। बस्तर संभाग में पहली बार किसी पूर्व सुरक्षा कैंप को छात्रावास के रूप में विकसित करने की यह पहल अबूझमाड़ में बदलाव की नई तस्वीर सामने ला रही है।
इस बदलाव की अहमियत विद्यार्थियों के अनुभवों में झलकती है। करीब 22 किलोमीटर दूर राजबेड़ा के रहने वाले कक्षा 12वीं के विद्यार्थी कोमेंद्र को पहले विद्यालय के पास रहने के लिए स्वयं आवास की व्यवस्था करनी पड़ती थी। इससे परिवार पर अतिरिक्त खर्च आता था। पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास खुलने से अब उन्हें सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिल गया है। हलामीमुंजमेटा से आने वाले कक्षा 9वीं के विद्यार्थी रितेश सोनी भी नए परिसर में आकर खुश हैं। वे बताते हैं कि यहां रहकर विद्यालय जाना और साथियों के साथ पढ़ाई करना अधिक सुविधाजनक हो गया है।
*परिसर वही लेकिन उद्देश्य नया*
जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित भाटपाल का सुरक्षा कैंप लंबे समय तक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। क्षेत्र के नक्सल मुक्त होने के बाद जिला प्रशासन ने इस परिसर का विद्यार्थियों के हित में उपयोग करने की पहल की। कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन ने इसे उन बच्चों के लिए छात्रावास में बदलने का सुझाव दिया, जिन्हें गांव से विद्यालय की दूरी और आवास की कमी के कारण पढ़ाई जारी रखने में कठिनाई होती थी। परिसर में 11 अगस्त 2026 से विद्यार्थियों के लिए आवासीय व्यवस्था शुरू हुई। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, भाटपाल छात्रावास से महज 50 मीटर दूर है। विद्यालय के निकट आवास मिलने से बच्चों की आवाजाही आसान हुई है और उन्हें पढ़ाई के लिए अधिक समय मिल रहा है। अब वही परिसर जहां क्षेत्र के सुरक्षा की रणनीति बनती थी वहां अब बच्चे अपने उज्जवल भविष्य की बुनियाद तैयार कर रहे हैं।









