
रायपुर:घरों से निकलने वाला कचरा अगर सही तरीके से एकत्र हो और उसकी व्यवस्थित छंटाई की जाए तो वही कचरा उपयोगी संसाधन बन सकता है। सरगुजा जिले के मैनपाट विकासखंड की ग्राम पंचायत कुदरीडीह में स्वेच्छाग्राही दीदियां इसी सोच को जमीन पर उतार रही हैं। घर-घर से कचरा संग्रहण और सेग्रीगेशन शेड में उसकी छंटाई के बाद दीदियों ने 650 किलोग्राम बिक्री योग्य कचरे की बिक्री की है। इससे गांव में स्वच्छता बनाए रखने के साथ कचरे से आय की संभावनाओं को भी आधार मिल रहा है।
सेवा संकल्प अभियान के तहत स्वच्छता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की कड़ी में कुदरीडीह की स्वेच्छाग्राही दीदियां गांव की स्वच्छता व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण से लेकर उसकी छंटाई और बिक्री योग्य सामग्री को अलग करने तक की प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
घर-घर से संग्रहण, सेग्रीगेशन शेड में कचरे की छंटाई
ग्राम पंचायत में घरों से निकलने वाले कचरे को इधर-उधर फेंकने के बजाय स्वेच्छाग्राही दीदियों द्वारा नियमित रूप से एकत्र किया जा रहा है। एकत्र कचरे को सेग्रीगेशन शेड तक पहुंचाने के बाद उसकी अलग-अलग श्रेणियों में छंटाई की जाती है।
इस प्रक्रिया में बिक्री योग्य सामग्री को अन्य कचरे से अलग किया जाता है। इसी व्यवस्था के तहत छंटाई के बाद अब तक कुल 650 किलोग्राम कचरे की बिक्री की गई है। इससे कचरे के व्यवस्थित प्रबंधन के साथ गांव को स्वच्छ रखने में भी मदद मिल रही है।
कचरा बना संसाधन, स्वच्छता के साथ आय की भी राह
कुदरीडीह की पहल यह दिखाती है कि घरों से निकलने वाला कचरा केवल निस्तारण की समस्या नहीं, बल्कि उचित संग्रहण और छंटाई के बाद उपयोगी संसाधन भी बन सकता है। बिक्री योग्य कचरे से प्राप्त राशि स्वच्छता गतिविधियों से जुड़े आर्थिक पक्ष को भी मजबूती देती है।
कचरे को एकत्र करने, अलग-अलग छांटने और बिक्री योग्य सामग्री को उपयोग में लाने की यह व्यवस्था गांव में बेहतर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की










