
बेमेतरा:गोपाल भैना। गोस्वामी तुलसीदास जी के पावन जन्मोत्सव के अवसर पर ग्राम गोपाल भैना में भक्ति, साहित्य, संस्कार और लोकमंगल की भावधारा से ओतप्रोत भव्य समारोह का आयोजन किया गया। वैदेही मानस मंडली गोपाल भैना के तत्वावधान एवं तहसील मानस संघ नवागढ़ के सहयोग से आयोजित यह समारोह अपनी 55 वर्षों से अनवरत चली आ रही परंपरा के कारण मानस-जगत में विशेष महत्व रखता है।
तुलसी जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर ग्राम का वातावरण श्रीरामचरितमानस की चौपाइयों, भक्ति-संगीत और रामनाम की मधुर ध्वनि से आध्यात्मिक आभा से आलोकित रहा। श्रद्धालुओं एवं मानस प्रेमियों ने गोस्वामी तुलसीदास जी के चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए उनके साहित्यिक एवं आध्यात्मिक अवदान का स्मरण किया।
“हर घर में रामायण का एक मंदिर हो” — देवलाल सिन्हा
समारोह को संबोधित करते हुए मा भद्रकाली जिला मानस संघ बेमेतरा के अध्यक्ष देवलाल सिन्हा ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस के माध्यम से भारतीय संस्कृति, लोकमंगल और जीवन-मूल्यों को जन-जन की चेतना से जोड़ा। मानस केवल काव्य का ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय जीवन-दर्शन की अमूल्य धरोहर और संस्कारों की अक्षय निधि है।
उन्होंने कहा “हर घर में रामायण का एक मंदिर होना चाहिए। श्रीरामचरितमानस को केवल पूजा के स्थान पर रखने वाला ग्रंथ न मानकर, जीवन के प्रत्येक सोपान पर मार्गदर्शन देने वाला दिव्य आलोक बनाना होगा। जिस घर में रामायण की चौपाइयां गूंजती हैं, वहां संस्कारों की सरिता प्रवाहित होती है, सद्भाव का दीप प्रज्वलित होता है और आध्यात्मिक चेतना का उदय होता है।”
उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जीवन-मूल्यों से जोड़ने के लिए मानस के संदेश को घर-घर पहुंचाना समय की महती आवश्यकता है। रामायण घर की शोभा नहीं, परिवार के संस्कारों की आधारशिला बने—यही तुलसी जन्मोत्सव की सार्थकता है।
महेश साहू ने रखी तहसील मानस संघ की गतिविधियों की रूपरेखा
सभा को महेश साहू, अध्यक्ष तहसील मानस संघ नवागढ़ ने भी संबोधित किया। उन्होंने संघ द्वारा मानस के प्रचार-प्रसार, मंडलियों के प्रोत्साहन तथा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार की जानकारी मंच से साझा की। उन्होंने कहा कि मानस मंडलियां समाज में भक्ति के साथ-साथ सदाचार, समरसता और सांस्कृतिक चेतना के संवाहक की भूमिका निभा रही हैं।
सात मानस पितामहों को श्री तुलसी सेवा सम्मान
तुलसी जन्मोत्सव समारोह में मानस साहित्य एवं श्रीरामकथा के प्रति दीर्घकालीन समर्पण, साधना और सेवा के लिए सात मानस साधकों को “श्री तुलसी सेवा सम्मान एवं श्री तुलसी अलंकरण” से सम्मानित किया गया।
सम्मान प्राप्त करने वालों में रामदास मानिकपुरी, झम्मन जायसवाल, भागीरथी ध्रुव, राम जी निषाद, बिंदाराम साहू, धुरवा राम साहू एवं अजय भुवाल शामिल रहे।
इन मानस साधकों का सम्मान वस्तुतः उन समर्पित साधना-पुरुषों का अभिनंदन था, जिन्होंने अपनी वाणी, साधना और सतत सेवा से मानस की ज्योति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रज्वलित रखा है।
मानस मंडलियों की प्रस्तुतियों ने बांधा भक्तिरस का समां
समारोह में विभिन्न मानस मंडलियों द्वारा भावपूर्ण एवं भक्तिमय प्रस्तुतियां दी गईं। वैदेही मानस मंडली गोपाल भैना, जिसके संस्थापक स्व. डॉ. गजानंद सिंह भुवाल रहे और अध्यक्ष धुरवा राम साहू हैं, ने अपनी प्रस्तुति से आयोजन को गरिमा प्रदान की।
इसी क्रम में ममता बालिका मानस मंडली नवागढ़ ने रामदास गुरुजी एवं श्री झम्मन जायसवाल के मार्गदर्शन में तथा नवदीप बालिका मानस मंडली अंबागढ़ चौकी ने हेमलता साहू के नेतृत्व में अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। बालिकाओं की प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि मानस की अमर परंपरा नई पीढ़ी के हृदय में भी उतनी ही श्रद्धा और ऊर्जा के साथ प्रवाहित हो रही है।
गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाई समारोह की शोभा
कार्यक्रम में उद्घाटन अवसर पर धनेश्वरी अजीत साहू, सरपंच कमल प्रसाद साहू, महेश साहू, नरेंद्र जायसवाल एवं लता निषाद सहित अनेक गणमान्य नागरिक, मानस साधक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का कुशल संचालन भीखम देवांगन, कल्याणी सेन, सनत साहू, जितेंद्र साहू एवं हरिराम साहू ने किया।
जिला मानस संघ के पदाधिकारी एवं मानस साधकों की रही सहभागिता
समारोह में मा भद्रकाली जिला मानस संघ बेमेतरा से उपाध्यक्ष माखन साहू, पूर्व तहसीलदार माधवराम साहू, संरक्षक राजकुमार ताम्रकार, विष्णु साहू, बिहारी लाल यदु, धनेश वर्मा, शालिकराम साहू, चेतन साहू, ओम यदु, सीताराम यदु, डॉ. ईश्वर सिन्हा, तानेश्वर साहू कल्याणी सेन मदनलाल सिन्हा, नोहरदास मानिकपुरी, सनतराम साहू, चंद्रभान ध्रुव, जनकराम साहू, डॉ. ललित साहू, बलराम साहू, श्रीराम साहू एवं संतोष सिन्हा सहित मानस परिवार के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
तुलसी की वाणी से घर-घर संस्कारों का दीप प्रज्वलित करने का संकल्प
तुलसी जन्मोत्सव का यह समारोह केवल उत्सव की औपचारिकता नहीं, बल्कि मानस की लोकयात्रा को निरंतर गतिमान रखने और तुलसी की वाणी को जन-जन के जीवन से जोड़ने का जीवंत संकल्प बना।
समारोह ने यह संदेश दिया कि जब रामकथा घर-घर पहुंचेगी, तब संस्कारों की सुगंध समाज में फैलेगी; जब मानस की चौपाइयां जीवन में उतरेंगी, तब मर्यादा और मानवीय मूल्यों का पुनर्जागरण होगा।
गोपाल भैना की पावन धरती पर 55 वर्षों से प्रवाहित हो रही यह मानस साधना की अविरल धारा आने वाली पीढ़ियों को भी भक्ति, साहित्य, संस्कृति और संस्कारों से जोड़ती रहे—इसी मंगल भावना के साथ तुलसी जन्मोत्सव समारोह श्रद्धा और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ।









