
रायपुर:राजधानी के श्री शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में चल रहे चातुर्मास्य प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए शिव पुराण की कथा को आधार करके शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ.इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने कहा कि *तप के द्वारा सब कुछ संभव है।*
ब्रह्मा जी के आदेश पर दक्ष ने मां दुर्गा की उपासना की अपनी इंद्रियों को समाहित करके कुछ दिन वायु का आहार किया सूखे पत्तों का आहार किया और घोर तपस्या की भगवती प्रसन्न हुई तो दक्ष ने वरदान मांगा की सृष्टि का सम्यक् संचालन करने के लिए सृष्टि की वृद्धि करने के लिए भगवान शिव का विवाह होना अत्यंत आवश्यक है भगवान शिव को मोहित करने की सामर्थ्य आपके पास ही है। ब्रह्मा जी के आदेश से मैं आपकी तपस्या कर रहा हूं। यह केवल मेरा कार्य नहीं है अभी तो समस्त देवताओं का इसमें स्वार्थ निहित है अतः मां आप कृपा कीजिए भगवती ने कहा कि भगवान शिव अनादि देव हैं, मैं उनकी दासी हूं यह काम बड़ा कठिन है फिर भी तुम इसका वरदान चाहते हो तो मैं संपूर्ण मनोयोग से तुम्हारे इस वरदान को पूर्ण करने का प्रयास करूंगी ऐसा कहकर भगवती ने कहा कि मैं स्वयं तपस्या करके भगवान शंकर को प्रसन्न करूंगी तपस्या के द्वारा सब कुछ संभव हो सकता है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भगवती सती ने नंदा व्रत कियाव नंदा व्रत प्रतिपदा,षष्ठी एवं एकादशी को किया जाता है। यह व्रत आश्विन मास से ही प्रारंभ किया जाता है ज्योतिष शास्त्र में प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी को नंदा कहा जाता है। प्रत्येक महीने में नंदा की छह बार आवृत्ति होती है। इस नंदा व्रत करने से भगवान शंकर प्रसन्न हो गए और माता सती को पति के रूप में प्राप्त हो गए जो नंदा व्रत को करता है भगवान शिव की प्रसन्नता उसे प्राप्त होती है। सुयोग्य वरप्राप्ति के लिए स्त्रियों नंदाव्रत करना चाहिए। कथा के पूर्व समस्त शिव भक्तों ने शिव पुराण पोथी का पूजन किया तथा आरती की। तत्पश्चात संस्कृत विद्यालय के छात्रों ने वेद पाठ किया।










