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रायपुर: छत्तीसगढ़ युवा विकास संगठन संचालित विप्र कला,वाणिज्य एवं शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय में दीक्षारंभ समारोह का आयोजन किया गया।दीक्षारंभ समारोह ज्ञानेश शर्मा (अध्यक्ष छत्तीसगढ़ युवा विकास संगठन) के मुख्य आतिथ्य एवं कार्यक्रम अध्यक्ष सुबीर तिवारी (संचालक विप्र शिक्षण समिति) के गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ।
दीक्षारंभ समारोह में नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए ज्ञानेश शर्मा ने कहा कि लक्ष्य निर्धारण और उसे प्राप्त करने के लिए अनुशासन के साथ कठोर परिश्रम उज्जवल भविष्य के लिए आवश्यक है। विद्यार्थी जीवन प्रत्येक मनुष्य का स्वर्ण काल होता है, इसके महत्व को समझते हुए जो सपना संजोकर रखे हैं, उसे पूरा करने के लिए पूर्ण समर्पण और एकाग्रता के साथ विद्यार्जन आवश्यक है। इस अवसर पर सुबीर तिवारी ने भारतीय ज्ञान परंपरा की गौरवशाली इतिहास का वर्णन करते हुए बताया वेद, वेदांत, उपनिषद का ज्ञाता विप्र कहलाता है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपने विषय का अध्ययन के साथ आत्म विकास के लिए इन ग्रंथो का अध्ययन करना भी आवश्यक है।
दीक्षारंभ समारोह में प्राचार्य डॉ.मेघेश तिवारी ने विप्र महाविद्यालय का परिचय देते हुए बताया कि 1996 में स्थापित विप्र महाविद्यालय 30 वर्ष पूर्ण करके 31वे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मापदंडों के के अनुरूप विकसित और सर्वसुविधा युक्त महाविद्यालय के सुविधाओं का उपयोग जब प्रत्येक विद्यार्थी करेगा, तब आप सभी का यहां प्रवेश लेना सार्थक होगा ।इस अवसर पर संयोजक डॉ. आराधना शुक्ला ने दीक्षारंभ समारोह मे अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम का विवरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर ऑल इंडिया एवं विश्वविद्यालय स्तर पर खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी।समारोह के पहले कार्यक्रम संयोजक डॉ आराधना शुक्ला ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए रूपरेखा प्रस्तुत की।समारोह का संचालन डॉ निधिश्री शुक्ला ने किया।
14 अगस्त भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उल्लेख करते हुए प्राचार्य डॉ.मेघेश तिवारी ने कहा की आजादी की खुशियों को भारत के विभाजन के बाद हिंसा ने निगल लिया ।इतिहास से सबक लेते हुए राष्ट्रीय एकता और भारत के अखंडता को बनाए रखने के लिए हम सब एक जिम्मेदार नागरिक बने ।अंत में भारत विभाजन के समय हिंसा में शहादत देने वाले भारतीयों को मौन श्रद्धांजलि दिया गया।















