रायपुर:बरसात का मौसम शुरू होते ही वातावरण में नमी और उमस बढ़ने तथा बारिश के पानी का सांप, बिच्छुओं व अन्य जंतुओं के बिलों में भर जाने के कारण ये सुरक्षित स्थान की तलाश में अक्सर बाहर आ जाते हैं। भोजन की खोज में ये घरों में घुस जाते हैं जिससे लोगों को इसके द्वारा काटे जाने का खतरा बढ़ जाता है। सर्पदंश जानलेवा भी हो जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर लोग सर्पदंश के मामले में चिकित्सा विज्ञान पर विश्वास नहीं करते और बैगा-गुनिया से झाड़-फूंक कराते हैं। सर्पदंश के शिकार लोग अंधविश्वास व अज्ञानता के कारण असमय काल-कवलित हो जाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा सर्पदंश की स्थिति में बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमृत रोहडेलकर ने बताया कि झाड़-फूंक से सर्पदंश से पीड़ित व्यक्ति की जान नहीं बचाई जा सकती है। अंधविश्वास के कारण ग्रामीण संर्पदंश के मामलों में झाड़-फूंक में समय नष्ट कर मरणासन्न स्थिति में पीड़ितों को चिकित्सालय लाते हैं जिस कारण पीड़ितों का जीवन बचाने में चिकित्सक भी असफल रहते हैं। उन्होंने बताया कि बेमेतरा के ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के मामलों में बचाव के लिए जनसामान्य में जागरूकता लाने विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है।










