
महासमुंद: जिले के बागबाहरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पहरनादादर की रहने वाली बिसाहिन कभी केवल वर्षा आधारित खेती पर निर्भर थीं। बारिश पर निर्भरता के कारण उत्पादन कम होती थी, जिसके कारण बिसाहिन के परिवार का गुजारा मुश्किल से हो पाता था। सीमित संसाधन और अनिश्चित आय के कारण जीवन संघर्षपूर्ण था, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत शुरू हुई कृषि तालाब निर्माण योजना ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। शासन द्वारा तालाब निर्माण के लिए 2 लाख 74 हजार 999 की राशि स्वीकृत की गई, जिसमें से 2 लाख 49 हजार रुपए 613 की लागत से एक सुंदर सीढ़ीनुमा कृषि डबरी का निर्माण किया गया। यह तालाब जल संचयन का एक उत्कृष्ट मॉडल बन गया। लगभग 20×20 मीटर की यह डबरी करीब 894 घन मीटर पानी संग्रहित करने की क्षमता रखती है, जो सूखे के समय में भी उनके लिए वरदान साबित हो रही है। जिला पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 अंतर्गत जिले में 501 आजीविका डबरी का निर्माण किया गया है।
बिसाहिन बताती है कि डबरी में पानी भरते ही उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ-साथ मछली पालन की शुरुआत की। पहले जहां वे केवल एक फसल पर निर्भर थीं, अब वे मछली बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित करने लगी हैं। इस नई पहल से उनकी सालाना आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही अब वे निजी जल स्रोत होने के कारण रबी की फसलें और सब्जियों की खेती भी आसानी से कर पा रही हैं।







