
रायपुर: निजी स्कूलो आरटीआई में भर्ती को लेकर चल रहा गतिरोध चिंता का विषय है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि सरकार हठ धर्मिता छोड़े तथा निजी स्कूलो से बातचीत कर मामले का समाधान निकाले। कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार तुरंत प्राइवेट स्कूल के प्रतिनिधियों से बात करे, गतिरोध समाप्त करें, ताकि बच्चों का एडमिशन हो सके। कांग्रेस की यूपीए सरकार ने गरीबों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने आर.टी.ई. लेकर आई थी, भाजपा सरकार उसमें अवरोध पैदा कर रही।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पहले आरटीई के भर्ती नियम में बदलाव कर निजी स्कूलों में नर्सरी को नही बल्कि पहली कक्षा को प्रवेश कक्षा माना गया जो सरासर गलत है। जबकि स्कूल की प्रथम कक्षा अगर नर्सरी है तो भर्ती उसी कक्षा से शुरू होगी। क्योंकि निजी स्कूलों में जो बच्चे खुद के खर्च से नर्सरी में भर्ती होते है वो प्रगति करते हुए पीपी वन/टू के बाद क्लास वन में पहुँचते है। जब क्लास वन की सीट पूर्व से शिक्षा ले रहे पीपी टू के बच्चां से भर जायेगी ऐसे में आरटीई के तहत गरीबो बच्चों के लिए सीट कहां बचेगा?
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि निजी स्कूल वालो की मांगे तार्किक और जायज है। वर्षो से उनकी फीस नहीं बढ़ाई गयी है जबकि खर्चे बढ़ गये है। 11 सालो से कोई बढ़ोत्तरी नहीं होना गलत है। इस संदर्भ में उच्च न्यायालय बिलासपुर का स्पष्ट फैसला 19 सितंबर 2025 को आ गया है। जिससे सरकार को स्पष्ट तौर पर प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने का निर्देश दिया जा चुका है। सरकार उनकी मांगो को मानने के बजाय धमकी चमकी पर उतर आई है। निजी स्कूलों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। असहयोग आंदोलन चला रहे है, फीस बढ़ोतरी नहीं होने पर गरीब बच्चों को आरटीई के तहत भर्ती नहीं करने की घोषणा कर दी है। प्रदेश के 6500 से अधिक निजी स्कूलों ने 28 जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी को भर्ती नहीं करने की लिखित सूचना भी दे दी है ऐसे में सरकार को हठधर्मिता त्याग कर निजी स्कूलों से चर्चा करना चाहिये। इस साल आरटीई की सीटों में 70 प्रतिशत की कटौती यह सरकार कर रही है ताकि पैसा कम देना पड़े, भले ही गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाये।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आरटीई के भर्ती में नियम में किये बदलाव को वापस लेना चाहिये, निजी स्कूलों के फीस बढोत्तरी पर चर्चा कर समाधान निकालना चाहिये। सरकार का मूल मकसद शिक्षा के अधिकार के तहत खर्च होने वाली राशि में कमी करना नही बल्कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों के प्रथम प्रवेश क्लास में भर्ती करा शिक्षा देना होना चाहिए।










