
रायपुर:भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय की उच्चस्तरीय टीम ने बस्तर के ग्राम चिलकुटी का दौरा कर पारंपरिक ढोकरा (बेलमेटल) शिल्प की संभावनाओं का जायजा लिया। इस क्लस्टर को मॉडल प्रीमियम क्लस्टर के रूप में विकसित करने की दिशा में चयन प्रक्रिया शुरू की गई है।
योजना के तहत एक वर्षीय कार्ययोजना बनाकर आधुनिक निर्माण इकाई, सामग्री भंडारण और इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली विकसित करने की योजना है। शिल्प उत्पादों की गुणवत्ता, ब्रांडिंग और पैकेजिंग को बेहतर बनाते हुए कारीगरों को राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही बस्तर कला गुड़ी एक्सपीरियंस जोन को मार्केटिंग हब के रूप में विकसित करने की पहल है, जिससे स्थानीय आदिवासी शिल्पकारों को अपने पारंपरिक हुनर के लिए व्यापक बाजार मिल सके।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुशासन सरकार बस्तर की समृद्ध जनजातीय कला-संस्कृति को नई पहचान दिलाने, स्थानीय शिल्पकारों के हुनर को बाजार से जोड़ने और उनकी आजीविका के अवसर बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है।









