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रायपुर:राजधानी के श्री शंकराचार्य आश्रम में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ.इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने बताया की भगवान श्री कृष्ण पूर्ण परमात्मा के अवतार है। श्रीमद् भागवत में भगवान श्री कृष्ण के संबंध में लिखा है कि *एते चांश कलाः कृष्णस्तु भगवान् स्वयम्* भगवान के अन्य अवतार या तो अंशावतार है अथवा कलावतार है किंतु भगवान श्री कृष्ण पूर्ण परमब्रह्म परमात्मा के ही अवतार है। भक्तों के कल्याण के लिए भक्तों की अभिलाषा पूर्ण करने के लिए वह परमब्रह्म परमात्मा परिपूर्णतम होते हुए भी अवतार धारण करते हैं। जगत का कल्याण भगवान के अवतार से होता है, भक्तों की लालसा भी भगवान की लीला से पूर्ण होती है भक्त भगवान से चाहे जो करा लें भगवान सब कुछ करने के लिए तैयार रहते हैं। भगवान स्वयं इच्छाहीन है, भक्त की इच्छा ही उनकी इच्छा है। अपने भक्तों की इच्छा पूर्ण करने के लिए भगवान श्री कृष्ण साक्षात् परिपूर्ण परब्रह्म परमात्मा होते हुए भी कंस के कारागार में अवतार लेते हैं। माता यशोदा की छड़ी देखकर के कांपते हैं।
जगत की समग्र शक्ति, समग्र धर्म, समग्र यश, समग्र लक्ष्मी समग्र सौंदर्य, समग्र माधुर्य, समग्र संपत्ति, समग्र ज्ञान, समग्र वैराग्य भगवान श्री कृष्ण में निवास करता है उनकी पूर्णता केवल भगवान श्री कृष्ण से ही है। श्री कृष्ण के बिना ज्ञान भी अपूर्ण है, वैराग्य भी अपूर्ण है, धर्म भी अपूर्ण है, यश भी अपूर्ण है, लक्ष्मी भी अपूर्ण है, तथा सौंदर्य और माधुर्य भी अपूर्ण है। भगवान श्री कृष्ण को प्राप्त करके अपूर्णता भी पूर्णता को प्राप्त कर लेती है। कथा के पूर्व कथा की पोती का पूजन यजमानों ने किया तथा मंगल पाठ का वचन जगद्गुरु कुलम् छात्रों ने किया।









