
रायपुर:श्री जगद्गुरु शंकराचार्य आश्रम, बोरियाकला, में चतुर्मास के पावन अवसर पर आयोजित शिव महापुराण कथा में माँ गोदावरी आनंदवन आश्रम के बुजुर्गों को कथा श्रवण एवं आध्यात्मिक वातावरण का लाभ मिला। आश्रम ट्रस्ट के योगेश तिवारी बुजुर्गों को साथ लेकर कथा स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने परम पूज्य 1008 यतिप्रवर दण्डी स्वामी डॉ इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज के श्रीमुख से शिव महापुराण की पावन कथा का श्रवण किया।
कथा श्रवण के दौरान बुजुर्गों ने श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ भगवान शिव का स्मरण किया और गुरुदेव के आध्यात्मिक विचारों को सुना। लंबे समय बाद धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में पहुंचकर कथा सुनने का अवसर मिलने से बुजुर्गों में विशेष प्रसन्नता और उत्साह देखने को मिला। कथा में गुरुदेव ने मानव जीवन के देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण के महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने समझाया कि मनुष्य का जीवन केवल व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं के लिए नहीं, बल्कि धर्म, सेवा, संस्कार, कर्तव्य और सद्कर्मों के लिए मिला है। माता-पिता एवं पूर्वजों का सम्मान, ऋषि-मुनियों द्वारा दिए गए ज्ञान और संस्कारों का संरक्षण तथा प्रकृति एवं देव शक्तियों के प्रति कृतज्ञता मानव जीवन के महत्वपूर्ण कर्तव्यों में शामिल हैं। श्री योगेश तिवारी ने कहा कि बुजुर्ग हमारे समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके जीवन के अनुभव और संस्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना उन्हें आत्मिक प्रसन्नता देने के साथ-साथ उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। उन्होंने कहा कि माँ गोदावरी आनंदवन आश्रम का प्रयास है कि यहां रहने वाले बुजुर्ग माता-पिता को परिवार जैसा अपनापन, सम्मान और खुशहाल वातावरण मिले। समय-समय पर उन्हें धार्मिक स्थलों के दर्शन, कथा श्रवण एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों में शामिल कराया जाता है, ताकि वे अपनी आस्था और रुचि के अनुसार इन पवित्र अवसरों का आनंद ले सकें। शिव महापुराण कथा के दौरान बुजुर्गों ने श्रद्धापूर्वक कथा का श्रवण किया और भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। कथा के आध्यात्मिक वातावरण ने सभी को भक्ति, सेवा, संस्कार और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर बुजुर्गों के लिए यह यात्रा केवल कथा श्रवण का अवसर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक आनंद, आत्मीयता और सम्मान का अनुभव भी रही। ट्रस्टी योगेश तिवारी द्वारा उन्हें कथा स्थल तक ले जाकर धार्मिक आयोजन में सहभागी कराना बुजुर्गों के प्रति सम्मान और अपनत्व की भावना को दर्शाता है।












