
रायपुर: पूरे प्रदेश में खाद की कमी के कारण बोनी और थरहा का काम प्रभावित हो रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि खाद के संकट से प्रदेश में हाहाकार, सरकार मौन है। किसानी पिछड़ रही है लेकिन सत्ता में बैठे जिम्मेदार केवल फर्जी दावें करके अपनी जिम्मेदारियों से दूर भाग रहे हैं। खाद की पर्याप्त उपलब्धता के सरकारी दावों को किसानों के साथ भद्दा मज़ाक है। किसान लगातार आंदोलित हैं, जगह जगह विरोध प्रदर्शन हो रहा है लेकिन किसान विरोधी यह सरकार केवल फर्जी दावें करके इस समस्या से ही इनकार कर रही है। इस खरीफ सीजन की खेती का समय तेजी से निकल रहा है लेकिन अभी तक पर्याप्त मात्रा में खाद और बीज उपलब्ध कराने में सरकार नाकाम है इसी वजह से खाद और बीज के कालाबाजारी हो रही है, नकली खाद अमानक गुणवत्ताहीन खाद बिक रहे हैं, किसान महंगे रेट पर खाद बीज खरीदने को मजबूर हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि जब सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज उपलब्ध नहीं है तो फिर महंगे दाम पर निजी दुकानों में कैसे बिक रहा है? नकली खाद और बीज आ कहां से रहे हैं? किसानों की शिकायत पर तत्काल ठोस कार्रवाई क्यों नहीं किया जा रहा है?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि मात्र 24 हजार टन डीएपी के कागजी आबंटन को अपनी उपलब्धि बता कर श्रेय लेने वाले भाजपा नेताओं को यह बताना चाहिए खुद के ही द्वारा तय लक्ष्य 15 लाख 55 हजार मीट्रिक टन में से केवल 7 लाख 27 हजार 833 मीट्रिक टन खाद ही किसानों को दिया गया है जो कि मांग के आधे से भी कम है। सबसे कम वितरण डीएपी और यूरिया का है जो किसानों के मांग की तुलना में चौथाई भी नहीं है। कभी किस्तों में खाद तो कभी टोकन पर देने के तुगलकी फरमान जारी किए, पिछले साल की तुलना में डीएपी में 40 प्रतिशत कटौती और यूरिया 20 प्रतिशत कम देने का आदेश? फिर टोकन सिस्टम वापस ले लिए, तय लक्ष्य का अब तक आधा भी दिए नहीं फिर यह आबंटन अतिरिक्त कैसे? किसानों को ठगना बंद कर समस्या के समाधान पर ध्यान दे सरकार।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि किसान अपने हक और हित की मांग को लेकर इस गूंगी बहरी सरकार के सामने आवाज उठा रहे हैं, उनके आवश्यता के अनुरूप खाद उपलब्ध कराने के बजाय इस सरकार ने किसानों को दी जाने वाले खाद की लिमिट घटा दी है, अब सोसाइटियों से कुल कर्ज के लिमिट में से नकदी और सामग्री का अनुपात 60ः40 से घटाकर 70ः30 कर दिया है, यही नहीं, इस सरकार ने पहले प्रति एकड़ दो बोरी यूरिया और दो बोरी डीएपी उपलब्ध कराने की जो व्यवस्था थी, अब इसे घटाकर प्रति एकड़ केवल एक बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी देने की लिमिट तय कर दी है, जो पर्याप्त नहीं है, गोठान बंद करके गोबर, वर्मी कंपोस्ट खाद की व्यवस्था पहले ही खत्म कर दिया गया है, अब किसानों के पास विकल्प ही क्या है?








