
रायपुर:छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्रहण ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के लिए रोजगार एवं आय का बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। गर्मी के मौसम में शुरू होने वाला यह कार्य अब हजारों परिवारों की आजीविका को मजबूती देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे रहा है। जंगलों से मिलने वाला “हरा सोना” ग्रामीणों के जीवन में आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा की नई कहानी लिख रहा है।
राज्य के विभिन्न जिलों में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सुबह से जंगलों में पहुंचकर तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में जुट जाते हैं। संग्रहण के एवज में शासन द्वारा दिए जा रहे पारिश्रमिक और प्रोत्साहन राशि से ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है और पलायन में भी कमी आई है।
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम पंचायत पचावल की श्रीमती तारकली सोनवानी बताती हैं कि पहले गर्मी के दिनों में परिवार चलाना कठिन होता था, लेकिन अब तेंदूपत्ता संग्रहण से हर वर्ष अच्छी आय हो जाती है। शासन से मिलने वाली राशि सीधे बैंक खाते में आने से जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अब मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है। ग्रामीण महिलाएं घर की जिम्मेदारियों के साथ संग्रहण कार्य कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। इस आय से वे बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा कर पा रही हैं।






