
रायपुर:जनगणना 2027 हमारे देश का एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान है, जो केवल आंकड़ों का संकलन नहीं बल्कि भविष्य के भारत और हमारे राज्य छत्तीसगढ़ के विकास की ठोस नींव तैयार करने का कार्य करेगा। यह प्रक्रिया हमें यह समझने में सक्षम बनाती है कि समाज के विभिन्न वर्गों तक विकास के लाभ किस प्रकार और कितनी प्रभावशीलता से पहुँच रहे हैं। जनगणना आंकड़ों का संग्रहण डिजिटल उपकरणों/माध्यमों से किया जाएगा। जनगणना कार्य में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी फील्ड कर्मचारियों को फोटो युक्त पहचान-पत्र जारी किए हैं। राज्य के सभी नागरिकों से अपील है कि वे केवल अधिकृत पहचान-पत्र वाले कर्मचारियों को ही जानकारी उपलब्ध कराएं।
जनगणना निदेशालय छत्तीसगढ़ के निदेशक श्री कार्तिकेय गोयल द्वारा छत्तीसगढ़ के नागरिकों से यह अपील की गई है कि वे अपने उत्तम ज्ञान के आधार पर प्रगणक को सही-सही जानकारी दें। नागरिकों द्वारा दी गई सही और पूर्ण जानकारी ही आने वाले समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, रोजगार एवं आधारभूत सुविधाओं से संबंधित योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी।
भारत में जनगणना 1872 से की जा रही है। भारतीय जनगणना का 150 वर्षों का इतिहास है। आगामी जनगणना देश की 16 वीं और स्वतन्त्रता के बाद की 8 वीं जनगणना होगी। छत्तीसगढ़ राज्य में जनगणना 2027 के प्रथम चरण यथा “मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना” का फील्ड कार्य दिनांक 01 मई, 2026 से प्रारम्भ हो रहा है जो 30 मई, 2026 तक संपादित किया जाएगा। वर्तमान समय में तकनीकी प्रगति को ध्यान में रखते हुए यह जनगणना विशिष्ट और उल्लेखनीय है, क्योंकि यह भारत की पहली ऐसी जनगणना होगी, जिसमें जनगणना आंकड़ों का संग्रहण डिजिटल उपकरणों/माध्यमों से किया जाएगा। यह परिवर्तन न केवल कार्य को अधिक पारदर्शी और तीव्र बनाएगा, बल्कि आंकड़ों की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को भी सुदृढ़ करेगा।








