रायपुर: शंकराचार्य आश्रम में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी स्वामी डॉ.इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने ज्योतिर्लिंगों की कथा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आश्रितजन के गुण दोषों का विचार नहीं किया जाता है। चंद्रमा में अनेक दोष है किंतु जब चंद्रमा भगवान शिव की शरण लेता है तो भगवान शिव उनको शिरोभूषण बना लेते हैं। कथा के विस्तार में महाराज ने बताया कि दक्ष की 27 कन्याएं थीं सबकी सब कन्याओं का विवाह चंद्रमा के साथ हुआ था किंतु चंद्रमा केवल रोहिणी से प्रेम करता था सब कन्याओं ने मिलकर दक्ष से शिकायत की दक्ष ने चंद्रमा को समझाया किंतु चंद्रमा नहीं माना तो दुखी होकर के चंद्रमा को दक्ष ने साप दे दिया कि तुम क्षय रोग से पीड़ित हो जाओ। तब देवताओं के परामर्श से चंद्रमा ने प्रभास क्षेत्र में जाकर 6 महीने तक लगातार मृत्युंजय एवं पार्थिव पूजन विधि से एक करोड़ जप किया भगवान शंकर प्रसन्न हो गए तथा वरदान देने के लिए पहुंचे चंद्रमा ने क्षयरोग से मुक्ति का वरदान मांगा भगवान ने कहा कि महीने के एक पक्ष में तुम्हारी कला की वृद्धि होगी और एक पक्ष में कला का क्षय होगा तभी से चंद्रमा की वृद्धि और क्षय प्रत्येक पक्ष में होने लगा है भगवान शिव को प्रसन्न जान करके सारे के सारे देवता आ गए सभी देवताओं ने भगवान शंकर से प्रार्थना की।उन्होंने कहा सब देवताओं की प्रार्थना को सुनकर के भगवान इस प्रभास क्षेत्र में निवास करने लगे और उन्हीं को सोमेश्वर लिंग के रूप से प्रसिद्ध हो गए। लोग आज भी भगवान शिव के सोमेश्वर स्वरूप का दर्शन करने से व्यक्ति पाप मुक्त हो जाता है, और चंद्र कुंड में स्नान करने से असाध्य रोगों की मुक्ति के साथ-साथ क्षय रोग से भी व्यक्ति मुक्त हो जाता है।
कथा के पूर्व श्री शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वानों ने भगवान के शिव भगवान पूजन पूर्व आरती संपन्न कराई जगतगुरु कुलम् के छात्रों ने वैदिक मंगलाचरण संपन्न किया।

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