रायपुर:श्री शंकराचार्य आश्रम में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज ने *अत्रीश्वर लिंग के महत्व को प्रकट करते हुए* अत्री अनुसूया संवाद में बताया कि पतिव्रता स्त्री के दर्शन करने मात्र से गंगा के भी पाप नष्ट हो जाते हैं। अकाल से पीड़ित अत्रि के तपोवन *कामदगिरि चित्रकूट में अनसूया की प्रार्थना से गंगा* माता प्रकट हुई और अत्री को अनुसूया ने गंगा जल से तृप्त कर दिया। अत्रि अनुसूया ने गंगा जी के सामने खड़े होकर प्रार्थना की कि आप इसी तपोवन में निवास कीजिए क्योंकि बड़े लोगों का ऐसा स्वभाव होता है कि वे एक बार किसी को स्वीकार करके उसे कभी नहीं छोड़ते हैं। गंगा ने स्वीकारोक्ति देते हुए कहा कि हे! *अनसूया तुम भगवान शंकर की पूजन का एवं अपने स्वामी की सेवा का 1 वर्ष का फल मुझे* प्रदान करो तो मैं देवताओं के उपकार के लिए तुम्हारे इस तपोवन में निवास करूं। दान, तीर्थ, स्नान, यज्ञ एवं योग से मेरी उतनी संतुष्टि नहीं होती है।
जितनी पतिव्रता स्त्री के दर्शन से होती है पतिव्रता स्त्री के दर्शन से मैं विशेष रूप से शुद्ध हो जाती हूं क्योंकि *पतिव्रता स्त्री साक्षात पार्वती के तुल्य होती है।*
इसलिए तुम लोकहित के लिए वह पुण्य मुझे देती हो और कल्याण की इच्छा रखती हो तो मैं यहां स्थिर हो जाऊंगी। तभी से गंगा चित्रकूट में मंदाकिनी के रूप में स्थित है।
कथा के पूर्व श्री शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वानों ने भगवान शिव का पूजन कर पोथी पुराण का पूजन किया तथा जगद्गुरुकुलम् की समस्त छात्रों ने मंगलाचरण किया।

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