रायपुर:पीएस रायल क्लब में कवयित्री नीलिमा मिश्रा की कविताओं का संग्रह बेंच पर कविता का विमोचन संपन्न हुआ।समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कथाकार डॉ परदेशीराम वर्मा ने कहा कि ये संबंधों की कविताएं हैं। कवयित्री ने अत्यंत संवेदनशील कदमों के साथ कविता की दुनिया में कदम रखा है। पुलवामा के शहीदों, निर्भया कांड, आदि सामयिक मुद्दों को गंभीरता से व्यक्त किया है। साहित्य वह कला है कि वह अनकहे को भी अभिव्यक्त करता है। स्त्री मन की यह कविताएं सुख दुख के घर बुनती हैं। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ भाषाविद डॉ चित्तरंजन कर ने कहा कि कविताएं कवयित्री की तरह भोली और निर्मल है। इस संग्रह में अनेक विषय सुंदरता से रूपायित हुई हैं। कविताएं कहानी की तरह बयान करती हैं।वरिष्ठ व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि कवयित्री जीवन की आपाधापी के बीच जी रहे मनुष्य के संघर्ष को परखती है और फिर लिखती हैं। वह स्त्री बिरादरी की पीड़ा को स्वर देती है।
प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत रामनारायण मिश्र, पूर्वी, सुहानी, अभिनंदन, कवयित्री नीलिमा सहित कवि परिवार ने किया। स्वागत भाषण देते हुए डॉ सुधीर शर्मा ने कहा कि नीलिमा मिश्रा की कविताएं जीवन के तमाम सुख दुख को अपने परिवेश के साथ जुड़कर संप्रेषित होती हैं। कविता संग्रह की कवयित्री नीलिमा मिश्रा ने अपने संग्रह की रचना प्रक्रिया की जानकारी देते हुए अपनी चार कविताओं का पाठ किया। सामयिक कविता ओ सरयू के माध्यम से उन्होंने अयोध्या के परिदृश्य का सुंदर चित्रण किया। समीक्षा पाठ करते हुए मीना शर्मा ने कहा कि ये कविताएं स्त्री मन की कोमल कविताएं हैं। डॉ मीता अग्रवाल ने कहा कि कवयित्री का व्यक्तित्व इस कृतित्व पर झलकता है।
इस अवसर पर कवि सुरेन्द्र रावल, अंबर शुक्ल, के पी सक्सेना, विजय मिश्र, गोपाल सोलंकी, राजेन्द्र ओझा, सुनील जायसवाल, पूर्व कुलपति डॉ शिवकुमार पांडे, रमेश तिवारी, दीपक हटवार, दिलीप वरवंडकर, डॉ भगवंत सिंह, डॉ हरिनारायण दुबे, अमृता शुक्ला, लतिका भावे, आशा मानव, विनय वर्मा, विभाष उपाध्याय, शोभा श्रीवास्तव, मोहन श्रीवास्तव, मुकेश शाह, अभिनंदन महेश वर्मा आदि उपस्थित थे।इस अवसर पर कवि सुरेन्द्र रावल, अंबर शुक्ल, के पी सक्सेना, विजय मिश्र, गोपाल सोलंकी, राजेन्द्र ओझा, सुनील जायसवाल, पूर्व कुलपति डॉ शिवकुमार पांडे, रमेश तिवारी, दीपक हटवार, दिलीप वरवंडकर, डॉ भगवंत सिंह, डॉ हरिनारायण दुबे, अमृता शुक्ला, लतिका भावे, आशा मानव, विनय वर्मा, विभाष उपाध्याय, शोभा श्रीवास्तव, मोहन श्रीवास्तव, मुकेश शाह, अभिनंदन महेश वर्मा आदि उपस्थित थे।समीक्षक मधु सक्सेना ने कहा कि ये कविताएं विचार के आकाश में इन्द्रधनुषी छटाएं बिखेरती हैं। भाव और विचारों का संयोजन है।कार्यक्रम का संचालन अनिल श्रीवास्तव जाहिद ने तथा आभार प्रदर्शन पूर्वी ने किया।









