नई दिल्ली: विक्रम लैंडर से बाहर आकर प्रज्ञान रोवर ने रात साढ़े 12 बजे से ही काम करना शुरू कर दिया है। रोवर प्रज्ञान चांद की सतह पर वॉक कर रहा है। रोवर को धीरे धीरे रैंप के जरिये चांद की सतह पर उतारा गया। सूरज की रोशनी पड़ते ही प्रज्ञान के सोलर पैनल एक्टिव हो गए और बैटरी चार्ज होने लगी। जैसी ही बैटरी चार्ज हुई, प्रज्ञान के साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ने सिग्नल भेजना शुरू कर दिया।रोवर प्रज्ञान ने रात 12.30 बजे के बाद से चांद की सतह की स्टडी की शुरुआत की। प्रज्ञान रोवर पर लगे पे लोड यानी साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स लगातार काम करते हुए चांद की सतह की स्टडी कर रहे हैं। लैंडर के दरवाजे खुलने के बाद अब तक लैंडर के अंदर सो रहे प्रज्ञान रोवर को जगाया गया यानी उसे रैंप के सहारे बाहर निकाला गया, इस दौरान उसे लैंडर से एक एंब्लिकल कोर्ड के जरिए बांधा गया था ताकि वो झटके से नहीं बल्कि धीरे धीरे रैम्प से नीचे उतर सके।रैंप से बाहर कदम रखते ही प्रज्ञान का सोलर पैनल सूरज की रोशनी में एक्टिव हुआ और उसके अंदर लगी बैटरी चार्ज होने लगी। बैटरी चार्ज होते ही प्रज्ञान भी पूरी तरह एक्टिव हो गया, उसके कैमरे ऑन हो गए और साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स ने सिगनल भेजना शुरू कर दिया।

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