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रायपुर:राजधानी के श्री शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति प्रदान करते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने बताया कि भगवद्लीला के श्रवण से से प्रपंच का विस्मरण होता है।
भगवान श्री कृष्ण अपने भक्तों को सुख देने के लिए नाना प्रकार की दर्शनीय बाल लीलाएं करते हैं। कभी कहते हैं कि हमको तो चंद्रमा दे दो। कभी खड़ा होने की कोशिश करते हुए गिर पड़ते हैं कभी बछड़े की पूछ पकड़ लेते हैं। चार बछड़े बैठे होते हैं तो धीरे-धीरे रेंगते हुए उनके बीच में पहुंच जाते हैं, और चारों वछडो की पूछ पकड़कर उनकी एक जगह गांठ बांध देते हैं फिर बछड़े उठकर खड़े होते हैं तो खुद भी उनकी पूछ पकड़ कर खड़े हो जाते बछड़े उधर भागने की कोशिश करते हैं लेकिन पूछ बंधी होने के कारण भाग नहीं पाते। जब भी बछडे इधर-उधर खींचते हैं तो श्री कृष्ण भी खिंचे चले जाते हैं। यह सब देख देख कर गोपिकाओं का अपना अपना घर द्वार छूट जाता है, प्रपंच का विस्मरण हो जाता है कर्माधिकार की समाप्ति हो जाती है और वह वेदांत प्रतिपाद्य परम ब्रह्म परमात्मा का दर्शन करने लगती है। गोपियां यह सब देख करके हंसती हैं और परमानंद प्रकट करती हैं उनके मन में यही विचार आता है कि यशोदा के भवन की सब वस्तुएं श्री कृष्ण के काम आती हैं किंतु हमारे भवन की कोई वस्तु भगवान श्री कृष्ण के काम नहीं आ रही है ऐसा विचार करके मन में संकल्प करती हैं कि भगवान हमारे घर भी दूध दही मक्खन खाने आए। भगवान उन गोपियों की इच्छा पूर्ण करने के लिए माखन चोरी की लीला करते हैं।
कथा के पूर्व श्रोताओं ने पूरन पुरुषोत्तम भगवान की पोथी का पूजन किया तथा वैदिक विद्वानों ने मंगलाचरण संपन्न किया।










