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रायपुर: छत्तीसगढ़ युवा विकास संगठन संचालित विप्र महाविद्यालय एवं शासकीय नवीन महाविद्यालय गुढ़ियारी के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन समारोह मुख्य अतिथि प्रो. एस.के. पांडेय( पूर्व कुलपति पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय एवं अध्यक्ष प्रवेश तथा शुल्क नियामक समिति ),तथा ज्ञानेश शर्मा पूर्व अध्यक्ष योग आयोग छत्तीसगढ ने अध्यक्षता की।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डॉ. गिरीश कांत पांडेय , प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय नवागढ़ बेमेतरा, डॉ. मधुलिका अग्रवाल ,प्राचार्य शासकीय नवीन महाविद्यालय गुढ़ियारी विशिष्ट अतिथि थे।
प्रथम सत्र के विषय विशेषज्ञ डॉ आलोक कुमार साहू( प्राचार्य एवं संचालक सिपेट रायपुर) के गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ। ब्रिजिंग एकेडमिक एंड इंडस्ट्री इनोवेशन इन एजुकेशन, कॉमर्स एंड कंप्यूटर विषय पर विकसित भारत @ 2047 अंतर्गत हाई ब्रीड मोड में आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए प्रो.एसके पांडेय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत डिग्री के साथ कौशल विकास आवश्यक है। आज भारत को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाने में युवाओं की मुख्य भूमिका रहेगी। इसके लिए आज प्रत्येक युवा को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास, चरित्र विकास, आत्म विकास शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए। स्टार्टअप ,इन्वेंशन बोलने से नहीं होगा ।इसके लिए अनुकूल माहौल और सुविधा होनी चाहिए। जमाने के हिसाब से इनोवेशन की परिभाषा और तौर तरीके बदल गए हैं। शिक्षण संस्थानों को अपने विद्यार्थियों को नए तौर तरीके से अवगत कराने के लिए तैयार होना होगा ।इस प्रकार के कार्यशाला का यही प्रमुख उद्देश्य है और विप्र कॉलेज का इस प्रकार का सतत प्रयास निश्चित ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने में सफल होगा ।इस अवसर पर ज्ञानेश शर्मा ने नई शिक्षा नीति की चुनौतियों का सामना करने के लिए इस प्रकार के कार्यशाला का महत्व स्पष्ट करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को कौशल विकास के लिए प्रेरित करने के लिए सही तरीके से सही समय में विषय विशेषज्ञों के माध्यम से इस प्रकार के कार्यशाला के द्वारा मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देना आवश्यक है।
प्रो.गिरीश कांत पांडेय ने अपने व्याख्यान में विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों का दोहन और प्रशिक्षण को आवश्यक बताया। इसके पूर्व शासकीय नवीन महाविद्यालय गुढ़ियारी की प्राचार्य डॉ .मधुलिका अग्रवाल ने तीन दिवसीय कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत किया। विप्र कॉलेज के प्राचार्य डॉ.मेघेश तिवारी ने इसके पूरा अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय में विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि महाविद्यालय विद्यार्थियों के बहुमुखी विकास के लिए समय-समय पर विषय विशेषज्ञों की सहायता से प्राध्यापकों को अपडेट करके विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षित करने का प्रयास कर रही है। इसके बाद प्रथम तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञ डॉ. आलोक कुमार साहू ने प्लास्टिक उद्योग के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पृथ्वी के लिए प्लास्टिक खतरनाक है। परंतु प्लास्टिक हमारे जीवन का एक हिस्सा है। प्लास्टिक को पूर्णत: प्रतिबंधित करना आज संभव नहीं है, परंतु पर्यावरण संरक्षण हेतु कचरा प्लास्टिक का सही निपटारा एवं प्रबंधन आज की आवश्यकता है। प्लास्टिक कचरा का निपटारा एवं कचरा प्लास्टिक का रीसाइकलिंग के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। इस अवसर पर दोनों महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापको सहित बड़ी संख्या में प्रतिभागी उपस्थित रहे।









