
Oplus_131072
रायपुर: पं माधवराव सप्रे जयंती पर महाराष्ट्र मंडल, छत्तीसगढ़ मित्र और जय जोहार साहित्य एवं संस्कृति संस्थान के आयोजन में छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कहा कि सप्रे जी ने हिंदी पत्रकारिता के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ परदेशी राम वर्मा ने की।
छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष और मुख्य अतिथि शशांक शर्मा ने कहा कि पं माधवराव सप्रे ने हिंदी पत्रकारिता के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। एक ओर उदंत मार्तण्ड ने प्रारंभिक योगदान दिया तो दूसरी ओर छत्तीसगढ़ मित्र के माध्यम से सप्रेजी ने योगदान दिया। भारत के भीतर स्वदेशी और स्वभाषा का बोध सप्रे जी ने कराया।डॉ सुशील त्रिवेदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ मित्र का दो सौ वर्ष की हिंदी पत्रकारिता में अतुलनीय योगदान है। सप्रे जी ने हिंदी पत्रकारिता के माध्यम से भाषा को तेजस्विता प्रदान की।वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में जो संस्कार दिखाई देता है उसका श्रेय पं माधवराव सप्रे को हैस्वागत भाषण देते हुए महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल सर्वसमावेशी संस्था है। मंडल निरंतर महापुरुषों की जयंती मना रहा है। सप्रे जी ने हिंदी और मराठी में भाषा अनुवाद को उस समय प्रोत्साहित किया।
आयोजन समिति के संयोजक डॉ सुधीर शर्मा ने कहा कि सप्रे जी व्यक्तित्व विकास के प्रबल समर्थक थे।स्वागत भाषण देते हुए महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल सर्वसमावेशी संस्था है। मंडल निरंतर महापुरुषों की जयंती मना रहा है।
सप्रे जी ने हिंदी और मराठी में भाषा अनुवाद को उस समय प्रोत्साहित किया।आयोजन समिति के संयोजक डॉ सुधीर शर्मा ने कहा कि सप्रे जी व्यक्तित्व विकास के प्रबल समर्थक थे।आयोजन में पांच मराठी मातृभाषी लेखक पत्रकारों का सम्मान किया गया। इनमें वरिष्ठ पत्रकार अनिल पुसदकर, प्रशांत कानस्कर, वरदा जोशी, लतिका भावे, साधना रहटगांवकर और दिल्ली की पत्रिका अनुस्वार के संपादक डॉ संजीव कुमार शामिल हैं।अतिथियों का स्वागत श्याम सुन्दर खंगन, रवीन्द्र ठेंगड़ी, डॉ कमल वर्मा, हेमंत मार्डीकर, जसवंत क्लाडियस, विजय मिश्रा, शिरीष त्रिवेदी आदि ने किया। आभार प्रकट रवीन्द्र ठेंगड़ी ने किया।








