
रायपुर:आज बोर्ड कार्यालय राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर के परिसर में “धान की खेती के बदले औषधि पौधों की खेती” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता बोर्ड के उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला द्वारा की गई। कार्यशाला का शुभारंभ मां सरस्वती को माल्यार्पण तथा पूजा अर्चना कर किया गया। तत्पश्चात बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला का पुष्प गुच्छ से स्वागत किया गया ।
अंजय शुक्ला ने अपने स्वागत उद् बोधन में धरसीवा ब्लॉक के विभिन्न गांव से पधारे किसानों से कहा कि छत्तीसगढ़ के किसानों को आर्थिक रूप से उन्नत बनाने के उदेश्य से बोर्ड औषधि पौधों की खेती को बढ़ावा दे रहा है, खासकर उन किसानों के लिए जो कि पारंपरिक रूप से धान की खेती करते आ रहे हैं जिसमें लागत अत्यधिक है और लाभ लागत की तुलना में बहुत कम होता है, उन सभी किसानो के लिए औषधि पौधे की खेती एक बहुत ही अच्छा विकल्प है, जिसमें लागत कम, मेहनत कम तथा लाभ अधिक होता हैं।
उन्होंने किसानो से कहा कि औषधि पौधों की खेती छत्तीसगढ़ के किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अपनी भूमिका अदा कर सकती हैं, इस हेतु बोर्ड औषधि पौधों की खेती के लिए किसानों को निशुल्क पौधे उपलब्ध कराता है । औषधि पौधों की खेती के लिए किसानों को प्रशिक्षण भी प्रदान करता है तथा आवश्यकता पड़ने पर अध्ययन भ्रमण करवाता हैं। किसानो की उपज की खरीदी हेतु बोर्ड पूर्व में ही कई संस्थाओ से अनुबंध कर उपज की खरीदी का का इंतजाम भी कर देता है।
कार्यशाला के द्वितीय चरण में कम पानी वाले खेतों में की जाने वाली सुगन्धित पौधों जैसे लेमनग्रास, खस एवं सिट्रोनेला की खेती कैसे की जाये इसके बारे में चरण दर चरण जानकारी दी ।
अंजय शुक्ला ने कार्यशाला में भागीदारी करने वाले सभी किसानों को सिंदूरी के पौधों का वितरण किया । अंत में श्री अंजय शुक्ला ने कार्यशाला में भागीदारी करने वाले सभी किसानों का आभार व्यक्त किया साथ ही आश्वासन दिया कि औषधि पौधों की खेती में किसी भी प्रकार की सहयोग के लिए बोर्ड हमेशा तत्पर रहेगा निशुल्क पौधों की उपलब्धता बनाए रखेगा, किसानों को अगर ट्रेनिंग की जरूरत होगी या एक्सपोजर विजिट की जरूरत होगी तो उसे जल्द से जल्द करा कर धरातल पर औषधि पौधों की खेती के जरिए किसानों के जीवन में आर्थिक संपन्नता के लिए दिन-रात काम करता रहेगा ।
इसके उपरांत बोर्ड में औषधि पौधों की खेती के सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे डी. के. एस. चौहान (रि. वनमंडलाधिकारी) द्वारा कार्यशाला के प्रथम चरण में विस्तार से प्रेजेंटेशन के माध्यम से किसानों को औषधि पौधों की खेती के बारे में जानकारी दी। सर्वप्रथम उन्होंने धान के खेतों में आसानी से की जाने वाली खेती ब्राह्मी तथा वच की खेती के बारे में जानकारी दी या साथ ही किसानों की जिज्ञासाओं तथा प्रश्नों का उत्तर भी दिया ।










