
रायपुर:धान की परंपरागत खेती के लिए पहचाने जाने वाले रत्नागर्भा जिला धमतरी में अब कृषि नवाचार और जल संरक्षण की नई इबारत लिखी जा रही है। वर्षों से धान-प्रधान खेती पर निर्भर इस जिले में पहली बार बड़े पैमाने पर फसलचक्र परिवर्तन को व्यवहार में उतारते हुए कम जल मांग वाली, अधिक लाभकारी और पर्यावरण-अनुकूल फसलों को बढ़ावा दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप जिले में तिलहन का रकबा दोगुने से अधिक, दलहनी फसलों में उल्लेखनीय वृद्धि तथा मूंगफली और सूरजमुखी जैसी नई फसलों की सफल शुरुआत हुई है। यह परिवर्तन किसी एक योजना का नहीं, बल्कि जिला प्रशासन की सुविचारित रणनीति, सतत निगरानी और किसानों की सक्रिय भागीदारी का प्रतिफल है।
कलेक्टर के नेतृत्व में अभियान का स्वरूप
इस परिवर्तन की धुरी बने कलेक्टर अबिनाश मिश्रा, जिनके नेतृत्व में फसलचक्र परिवर्तन को एक जन-अभियान का रूप दिया गया। उन्होंने स्वयं गांव-गांव पहुंचकर खेतों का निरीक्षण किया, किसानों से सीधा संवाद किया और उन्हें धान के विकल्प के रूप में दलहन, तिलहन एवं लघु धान्य फसलों के लाभ समझाए। कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दिया कि जल संरक्षण के बिना कृषि का भविष्य सुरक्षित नहीं है और इसके लिए फसल विविधीकरण अनिवार्य है। उनके मार्गदर्शन में कृषि विभाग द्वारा वैज्ञानिक पद्धतियों, उन्नत बीजों, आधुनिक कृषि तकनीकों और बाजार से जुड़ी जानकारियों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया गया।








