रायपुर:छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के औद्योगिक वृक्षारोपण मंडल, कोरबा द्वारा माइनिंग डंप क्षेत्रों में किया जा रहा वृक्षारोपण पर्यावरण संरक्षण का एक सफल और प्रेरक उदाहरण बन गया है। औद्योगिक वृक्षारोपण का मुख्य उद्देश्य खदानों से होने वाले भूमि क्षरण, प्रदूषण, जैव विविधता की हानि और मिट्टी कटाव जैसी पर्यावरणीय समस्याओं को कम करना है। साथ ही उजड़े हुए क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाकर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार भी सृजित किए जा रहे हैं।
डंप क्षेत्र को हरे-भरे जंगल में बदलने की पहल
कोयला खदानों के दौरान बड़ी मात्रा में मिट्टी, मुरुम, पत्थर और अपशिष्ट पदार्थ निकालकर डंप में जमा किए जाते हैं। इन क्षेत्रों में प्राकृतिक मिट्टी की कमी, कम उर्वरता और कम नमी के कारण वृक्षारोपण चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद निगम द्वारा डंप पर 20-30 सेमी उपजाऊ मिट्टी बिछाकर रोपण के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार किया गया।
गांधीसागर डंप- जैव विविधता में उल्लेखनीय सुधार
औद्योगिक वृक्षारोपण मंडल, परिक्षेत्र कोरबा में वर्ष 2019 में गांधीसागर डंप क्षेत्र का चयन किया गया। कुल 19 हेक्टेयर क्षेत्र में 47 हजार 500 पौधों का रोपण किया गया। पथरीली, कोयला अपशिष्ट युक्त और पहाड़ी संरचना होने के बावजूद यह रोपण आज एक सघन, हराभरा मानव निर्मित जंगल का रूप ले चुका है। यहां पक्षी, गिलहरी, सियार आदि वन्य प्राणियों की संख्या बढ़ने से जैव विविधता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।








