रायपुर:अब गांव में भी गांव जैसा माहौल नहीं रहा…धीरे-धीरे सब कुछ बदल गया है —
न सड़कें वही रहीं,
न लोग, न तौर-तरीके।
पर जो नहीं बदला,
वो हैं हमारे संस्कार, धार्मिक अनुष्ठान और वह पीढ़ी,
जो अब भी परंपरा निभाने की चाह रखती है और निभा रही है।
आज गोवर्धन पूजा के शुभ अवसर पर
मां गौरी और भगवान गौरा के परिवार सहित पूजन-अर्चन किया, गौमाताओं की सेवा का सौभाग्य मिला। मां की कृपा से हमारी गौशाला आज गौवंश से परिपूर्ण है —
यही हमारी असली समृद्धि है।
पर सच कहूं तो,
अब गांव में भी गांव जैसा माहौल नहीं रहा।
शहर की बीमारी गांव-गांव तक फैल गई है।
विवाद की राजनीति और नशा — दोनों ही
अब गांव की गलियों में उतर आए हैं।
युवा और बच्चे इस लत से नहीं बच पा रहे —
शराब, गांजा, अफीम, पुड़िया, गोलियां…
सब कुछ खुलेआम बिक रहा है।
बोलने वाला कोई नहीं,
और जो बोलता है, वही दोषी ठहराया जाता है।
थाने में खबर देर से पहुंचती है,
पर अपराधी पहले पहुंच जाते हैं गजब का तालमेल है दोनों का।
फिर भी,
इन सबके बीच गांव की आत्मा अब भी जीवित है।
संस्कार, परंपरा, भाईचारा —
अब भी बिना जातिवाद, बिना भेदभाव के
गांव के दिल में धड़कते हैं।





