रायपुर : “वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने मोदी 3.0 सरकार का पहला बजट खाद्य वस्तुओं की बढ़ती मंहगाई, रुके हुए आर्थिक विकास, घटते रोजगार, गिरता रुपया, आम जन की घटती क्रय शक्ति, किसानों के आन्दोलन और विकासमान अर्थव्यस्थाओं पर ट्रम्प के अमेरिकी प्रशासन की धमकियों के बीच पेश किया है।जनता एक ऐसा राहत देने वाला बजट चाहती थी जिसमें बढ़ रही आर्थिक विषमता कम हो और आम जन की क्रय शक्ति बढ़ेl लेकिन भाजपा की केंद्र सरकार ने पिछली गलतियां सुधारने की बजाय इस बार भी अमीर परस्त बजट ही पेश किया है l मध्यम वर्ग को आयकर में बहुत मामूली राहत मिली है, जिसका काफी ढिंढोरा पीटा जा रहा है lलेकिन मजदूरों, किसानों और आम मेहनतकश जनता को मुश्किल हालातों में ऐसे ही छोड़ दिया गया है जो चिन्ताजनक है।उन्हें राहत देने के लिए आवश्यक उपभोक्ता सामग्री पर जीएसटी में कमी करने और जनकल्याण योजनाओं में खर्च बढ़ाने की जरूरत को अनदेखा किया गया है. कॉरपोरेटों और अमीरों पर टैक्स बढ़ाने के लिए सरकार में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी साफ तौर पर उजागर हो रही हैl निजी क्षेत्र के लगातार बढ़ रहे मुनाफे के बावजूद सरकार की प्राथमिकता अमीरों पर टैक्स बढ़ाने की जगह जनकल्याण, सामाजिक, कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में खर्च कम करने की है । यह बिल्कुल जनविरोधी दिशा हैl बजट में बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफ डी आई का प्रस्ताव पूर्णत: देश विरोधी है।”
आज केंद्रीय बजट के खिलाफ मजदूरों किसानों के राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के आव्हान पर रायपुर में अम्बेडकर चौक में आयोजित विरोध कार्यवाही को संबोधित करते हुए सेंट्रल जोन इंश्योरेंस एम्पलाईज एसोसिएशन के महासचिव का. धर्मराज महापात्र,सीटू के राज्य महासचिव एम के नंदी, संयुक्त ट्रेड यूनियन कौंसिल के सचिव एस सी भट्टाचार्य, आर डी आई ई यू के अध्यक्ष राजेश पराते,।महासचिव सुरेंद्र शर्मा, सी जी एस पी ई यू के उबैद खान, विभाष पैंतुडी ने उक्त बातें कही । नेताओं ने कहा कि केन्द्रीय योजनाओं पर सरकार ने पिछले साल बजट में घोषित मद से 93,978 करोड़ कम खर्च किये है । प्रधानमंत्री आवास योजना और नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर मिशन पर पिछले साल घोषित राशि का मात्र 50 प्रतिशत से भी कम खर्च किया गया । मनरेगा, ग्राम सड़क योजना, अनुसूचित जाति के लिए स्कॉलरशिप आदि में भी इस बार अपेक्षा से कम राशि दी गई है lस्वस्थ्य महिला और बाल विकास पर भी पूरी आवंटित राशि खर्च नहीं की गई थी lइस साल के बजट में कृषि और किसान कल्याण विभाग का आवंटन, खाद्य और जनवितरण विभाग के बजट में भी अपेक्षा के अनुरूप खर्च नहीं किया गया है। स्किल डेवलपमेंट और एन्टरप्रिन्योरशिप के नाम पर पिछले बजट में काफी कुछ कहा गया था, लेकिन इस मद में दिये गये 1435 करोड़ में से सरकार ने मात्र 669 करोड़ की खर्च किये ।स्वास्थ्य पर भी वास्तविक खर्च पिछले साल की गई घोषणा से कम रहा ।आशा, आंगनबाड़ी, मिड—डे मील व अन्य स्कीम वर्कर्स की नियमित करने और कम से कम न्यूनतम मजदूरी देने की मांग को फिर से नकार दिया गया है, जो चिन्ताजनक है ।सरकार ने बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश को 100 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है, जबकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में आवंटन घटाया है।जाहिर है देश के किसान और आम जन को बड़े निजी कारपोरेशनों की दया पर छोड़ा जा रहा है सरकार ने पिछले साल पूंजीगत निवेश बढ़ाने की घोषणा कर खुद ही अपनी तारीफों के पुल बांध दिये थे, लेकिन सच्चाई सामने आ रही है कि घोषणा से 1.84 लाख करोड़ रुपये कम खर्च किये गये है! इस बजट में जरूरी क्षेत्रों में खर्च न बढ़ा कर सरकार की गलत दिशा में जारी प्राथमिकतायें फिर से उजागर हुई हैंl आंकड़े स्पष्ट बता रहे हैं कि कुल बजट खर्च में दिख रही बढ़ोतरी का करीब 40 प्रतिशत तो लिये गये कर्ज का अतिरिक्त ब्याज चुकाने में ही खर्च हो जायेगा । जबकि जरूरतमंद आम जन पर बोझ बढ़ता जा रहा है, वहीं जीएसटी व इन्कम टैक्स की हिस्सेदारी कॉरपोरेट टैक्स से ज्यादा हो रही है । यह बजट मोदी सरकार की अपने क्रोनी पूंजीपतियों और कॉरपोरेट क्षेत्र के पक्ष में जारी आर्थिक अराजकता को पुन: स्थापित कर रहा है lमजदूरों की वास्तविक मजदूरी दर में आयी कमी और उनके नियमित रोजगार के कम हो रहे अवसर की सच्चाई को अनदेखा किया गया है, जबकि सरकार जानती है कि कॉरपोरेट घरानों का मुनाफा चार गुना तक बढ़ गया है, फिर भी सरकार कॉरपोरेटों पर टैक्स नहीं बढ़ाना चाहती l ऐसे में यह बजट वर्तमान आर्थिक विषमता बढ़ाने वाला, मजदूरी दर और रोजगार के अवसरों पर हमला करते हुए कॉरपोरेटों के मुनाफे को और बढ़ाने वाला बजट है ।
आज के प्रदर्शन के दौरान बजट की प्रतियों का पुतला जलाकर विरोध व्यक्त किया गया l संयुक्त प्रदर्शन में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन, रायपुर डिवीजन इंश्योरेंस एम्पलाईज यूनियन, संयुक्त ट्रेड यूनियन कौंसिल, दवा प्रतिनिधि संघ, सेंट्रल जोन इंश्योरेंस एम्पलाईज एसोसिएशन सहित विभिन्न जन संगठनों से जुड़े सैकड़ो लोग शामिल हुए ।








