
रायपुर: छत्तीसगढ़ में अनियमित कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करने की तैयारी को लेकर पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सरकार की यह कथित कार्रवाई हजारों परिवारों के साथ अन्याय और उनके भविष्य के साथ क्रूर खिलवाड़ है।
विकास उपाध्याय ने कहा कि “यह कैसी सरकार है, जो रोजगार देने के नाम पर सत्ता में आती है और अब वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों की रोजी-रोटी छीनने पर आमादा है? क्या सरकार की संवेदनाएं पूरी तरह मर चुकी हैं?”
अनियमित कर्मचारी वर्षों से शासन-प्रशासन की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। विभागों में काम का बोझ उठाने वाले इन कर्मचारियों ने अपनी मेहनत और सेवाओं से व्यवस्था को चलाया है। आज उन्हीं कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी करना सरकार की कृतघ्नता और कर्मचारी विरोधी सोच का प्रमाण है।
उपाध्याय ने कहा कि लोक निर्माण मंत्री अरुण साव जी दैनिक वेतन भोगियो को चुन चुन कर निकालना बन्द करे, कांग्रेस सरकार में लोनिवि के दैनिक श्रमिको का मैं नियमितिकरण नही करवा पाया उसका खेद है पर कांग्रेस सरकार में किसी की दैनिक वेतन भोगी की छटनी भी नही की इसका गर्व भी है बल्कि 4 हजार अतिरिक्त मासिक भुगतान की व्यवस्था करवाई, जिसे वर्तमान 100ः लोनिवि मंत्री लागू भी नही कर पाए। वर्ष 2018 के अंत मे कांग्रेस की सरकार बनी वर्ष 2019 व 2020 में कोविड रहा, उसके बाद कांग्रेस के कार्यकाल में कुछ छत्तीसगढ़िया एसटी, एससी, ओबीसी सामान्य वर्ग के जरूरतमंद लोगों को दैनिक वेतन भोगी के रूप में कार्य मे रखा गया। पिछली सरकार ने 57 विभागों के 50 हजार ऐसे दैनिक वेतन भोगियों के लिए बाकायदा 4 हजार मासिक श्रम सम्मान का 240 करोड़ वार्षिक का बजट प्रवधान किया जो आज भी जारी है उसका 100 प्रतिशत लाभ तो 6437 श्रमिको को लोक निर्माण मंत्री दिलवा नहीं पा रहे है, छटनी में कांग्रेस-भाजपा का अघोषित मापदंड अपना रहे हैं, जबकि सम्पूर्ण सत्यता यही है।
विकास उपाध्याय ने कहा कि लोक निर्माण विभाग स्वयं प्लेसमेन्ट एजेंसी बनकर कार्य कर रहा है। लोक निर्माण विभाग में प्रमुख अभियन्ता, अधीक्षण अभियंता, मुख्य अभियन्ता, कार्यपालन अभियंता, अनुविभागीय अधिकारी जैसे समस्त कार्यालयों, विभागीय रेस्ट हाउस कुछ स्व निर्मित पुल पुलिया भवन,ऑडोटोरियम, स्टेडियम के संग विभागीय मंत्री सचिव, विभागीय अधिकारी के बंगले के देखभाल की जिम्मेदारी मात्र है जो वह अपने विभागीय दैनिक मासिक श्रमिक रख कर करता है, परंतु इसके अलावा चाटुकारिता के विभाग के कुछ बड़े अधिकारी, अन्य विभागों के सचिव, सेवानिवृत पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के निज आवास, मंत्रालय , इंद्रावती भवन के अन्य विभागों के कार्यालयों, पूर्व मंत्रियों विधायको, सांसदों, कार्यालय संलग्न अभियंताओं और उप अभियंताओं अधिकारियों को कर्मचारी जिन्हें नियमानुसार कर्मचारी रखने का अधिकार नहीं है उनके सुविधा के लिए, घरेलू सुविधा में भी कार्यालयों से वेतन भुगतान प्रदान कर दैनिक वेतन भोगी श्रमिक 10 वर्ष 15 वर्ष से नियोजित कर के रखे गए हैं। यह श्रमिक उनके दैनिक घरेलू कार्य भोजन, कपड़े बर्तन वाहन चलाने में अपनी सेवा दे रहे हैं, 6437 दैनिक वेतन भोगी बढ़ कर वित्तीय बोझ पीडब्ल्यूडी का बढा रहे है, इसे रोकने ही सचिव लोक निर्माण ने छटनी के आदेश सम्भवतः ईएनसी को दिए हैं, परन्तु प्रमुख अभियन्ता वर्ष बन्धन के आधार विभिन्न कार्यालयों में आवश्यक दैनिक वेतन भोगियों की छटनी के आदेश मौखिक रूप से विडियो कांफ्रेंसिंग में दे रहे है, जिससे कार्यालयों के कार्य प्रभावित होने आरंभ हो गए हैं, लोक निर्माण विभाग में कुछ दैनिक वेतन भोगियो का पूरा परिवार कार्य कर रहा है, पति पत्नी पिता माता पुत्र पुत्री पुत्री भाई बहन कुछ नियमित कर्मचारियो का परिवार भी दैनिक वेतन भोगी के कार्यो में लगे है, नियमित कर्मचारी सेवानिवृत्त के बाद पेंशन लेते हुए दैनिक वेतन भोगी के रूप में सेवा दे रहे है इन समस्त लापरवाहियों के कारण वित्तीय भार व दैनिक श्रमिको की संख्या बढ़ रही है। प्रमुख अभियन्ता को भौतिक सत्यापन के संग सभी नियमित कर्मचारी व दैनिक वेतन भोगियों से अन्य पारिवारिक सदस्य दैनिक वेतन भोगी के रूप में विभाग कार्यरत नहीं है शपथ पत्र लेकर कार्यवाही आरम्भ करनी चाहिए, किसी वर्ष विशेष से छटनी के बजाए ऐसे श्रमिक जो विभाग के कार्यालयों, विभाग के उपक्रमो के अलावा अन्य किसी स्थान, अन्य विभाग, घरेलू कार्यों में संलग्न हैं उनकी छटनी का स्पष्ट आदेश देना चाहिए, भले ऐसे श्रमिक जो कभी पीडब्ल्यूडी कार्यालय में एक दिन भी काम नहीं किये परन्तु 15 साल से दूसरे विभागों अन्य बंगलो में घरेलू कार्य मे संलग्न हैं उन्हें तत्काल पृथक करना चाहिए।
सरकार को शर्म आनी चाहिए कि जिन कर्मचारियों के श्रम से सरकारी व्यवस्था चल रही है, उन्हीं के परिवारों को बेरोजगारी की आग में झोंकने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की नौकरी केवल उनकी व्यक्तिगत आजीविका नहीं, बल्कि उनके बच्चों की शिक्षा, परिवार का भरण-पोषण और सम्मानजनक जीवन का आधार है। नौकरी छीनकर सरकार हजारों परिवारों को आर्थिक संकट में धकेलने का काम कर रही है। यह निर्णय किसी भी संवेदनशील सरकार को शोभा नहीं देता।
विकास उपाध्याय ने सवाल किया कि यदि सरकार के पास कर्मचारियों को हटाने की योजना है, तो क्या उसके पास उनके परिवारों के भविष्य की कोई जिम्मेदारी नहीं है? क्या सरकार यह बताएगी कि वर्षों तक सेवा लेने के बाद कर्मचारियों को बेरोजगार करना किस न्याय और नीति के अंतर्गत आता है?
उन्होंने स्पष्ट कहा कि “अनियमित कर्मचारियों को हटाने का फैसला सरकार की तानाशाही सोच को उजागर करता है। कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा लेना बंद किया जाए। सरकार को रोजगार छीनने की नहीं, रोजगार सुरक्षित करने और नियमितीकरण की दिशा में काम करने की जरूरत है।”
विकास उपाध्याय ने राज्य सरकार से मांग की कि अनियमित कर्मचारियों को हटाने की किसी भी कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और नियमितीकरण को लेकर स्पष्ट नीति घोषित की जाए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों के हितों की अनदेखी जारी रखी, तो कांग्रेस कर्मचारियों के साथ खड़ी होकर इस अन्याय के खिलाफ सड़क से सदन तक आवाज बुलंद करेगी।
“कर्मचारियों की मेहनत का अपमान करने वाली सरकार को जनता और कर्मचारी वर्ग कभी माफ नहीं करेगा। रोजगार छीनने की राजनीति बंद करो, कर्मचारियों को उनका अधिकार दो।”










