
रायपुर:यह कोई पहली तस्वीर नहीं है आप पिछले 20 साल के इतिहास उठा ले दशहरे के दिन स्वस्थ पूजा के बाद फायरिंग के अनेक चित्र आपको अखबारों में सोशल मीडिया में समाचार चैनलों में मिल जाएगा, कभी इतना हाय तौबा नहीं मचा बड़े-बड़े लोग बाहर के लोग किसी का बयान आज तक नहीं आया देश के हर कोने में शस्त्र पूजन के बाद हर्ष फायरिंग की परंपरा है।
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल में पढ़कर, अपनी मेहनत, प्रतिभा और संघर्ष के दम पर IPS अधिकारी बनी अंकिता शर्मा ने अपनी अलग पहचान बनाई है, उन्हें आज भी अपने लोगों से आम जनता से छत्तीसगढ़ में बात करने में संवाद करने में कोई हिचक नहीं वह जनता से ऐसे घुल मिल जाती है जैसे उनके बीच की हो उनके साथ की हो खासकर ग्रामीण क्षेत्र के महिलाओं से तो उन्हें वह एक अधिकारी नहीं अपने घर के बच्चे समझती है। AK-47 चलाने वाली इस महिला अधिकारी की साड़ी पहनकर ड्यूटी करने की तस्वीर कुछ लोगों को इतनी खटक क्यों रही है? क्या वर्दी के भीतर एक महिला की अपनी सांस्कृतिक पहचान नहीं हो सकती?
विडंबना देखिए! भारतीय परंपरा में नारी को शक्ति का स्वरूप बताने वाले समाज में, जब एक महिला अधिकारी अपनी परंपरा के अनुरूप साड़ी पहनती है, तो उसी पर सवाल उठने लगते हैं!
अगर किसी नियम के उल्लंघन के कारण नोटिस दिया गया है, तो उसका आधार सार्वजनिक होना चाहिए। लेकिन यदि विवाद का वास्तविक कारण उनका पहनावा है, तो यह मानसिकता पर सवाल खड़े करता है। कानून का पालन जरूरी है, मगर कानून की आड़ में किसी की व्यक्तिगत पसंद को निशाना बनाना उचित नहीं।
और अब सबसे बड़ा सवाल—महादेव ऐप सहित बड़े-बड़े मामलों में बहुत सारे आईपीएस आईएएस अधिकारियों के नाम आए छत्तीसगढ़ के लूट के मामले में तो आईएएस, आईपीएस अधिकारियों के नाम आए मामले में जिन अधिकारियों के नाम सामने आए, उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई? क्या जाँच पूरी हुई? क्या जवाबदेही तय हुई? यदि आरोपों की प्रकृति समान है, तो कार्रवाई के मानदंड भी समान होने चाहिए। दूसरे पुलिस अधिकारियों और कलेक्टरों के मामलों में भी यही कसौटी लागू होगी या नहीं? आखिर कानून की तलवार सबके लिए है या सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए?
छत्तीसगढ़ की बेटी अंकिता शर्मा की आलोचना तथ्यों और नियमों के आधार पर कीजिए, साड़ी के आधार पर नहीं। उनकी उपलब्धियों, अपनापन को उनके पहनावे के चश्मे से देखना नारी सम्मान की बात करने वालों के दोहरे मापदंडों को उजागर करता है।
याद रखिए—साड़ी किसी अधिकारी की क्षमता कम नहीं करती और वर्दी किसी को सवालों से ऊपर नहीं उठाती। कसौटी एक ही होनी चाहिए: निष्पक्षता और जवाबदेही।
छत्तीसगढ़ की जनता यहां के लोग अपनी बेटी के साथ खड़े है —दशहरा पर्व पर भारतीय संस्कृति संस्कार साड़ी के पीछे विवाद खड़ा करना कुछ लोगों की सोची समझी मानसिकता को प्रदर्शित करती है है?
(मनोज शुक्ला)








