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रायपुर:राजधानी के श्री शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला रायपुर में चल रहे चातुर्मास क्रम के गति देते हुए डॉक्टर स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने श्रीमद् भागवत के प्रसंग में विदुर मैत्रेय के संवाद को विस्तार देते बताया कि अधर्म में रुचि ही प्राणियों के दुःख का कारण है।
मैत्रेय जी विदुर जी के प्रश्न का उत्तर देते हुए कह रहे हैं कि संसार के प्राणियों के दुःख पर दुख प्राप्त होते रहते हैं। संसार में मनुष्य एक तो माया के कारण भगवान से विमुख हो गया है दूसरा अधर्म में उसकी रुचि हो गई। अधर्म में रुचि होने के कारण दुख होना निश्चित ही है। मनुष्य जब दुःखी होता है तब घबराता है लेकिन उसे घबराना तो तब चाहिए जब वह दुःखजनक काम करता है। चोरी करते समय मनुष्य घबराते नहीं है जब सजा मिलती है तब घबराता है इसलिए दुःख से बचने का उपाय दुःख जनक कर्मों का परित्याग ही है। जब तक दुःखजनक कर्मों का परित्याग प्राणी नहीं करेगा तब तक वह दुःख से कदापि मुक्ति नहीं हो सकता है।
मुनिवर मैत्रेय जी दुःखी लोगों पर कृपा करने के लिए आप जैसे जनार्दन भगवान के दूत अथवा पार्षद इस धरती पर विचरण किया करते हैं। आप कृपा करके हमको यह बताएं कि वह कौन सा मार्ग है जिससे हमारा हृदय भक्ति पवित्र हो जाए और भगवान उसमें आकर बैठ जाएं।
कथा के पूर्व समस्त श्रद्धालुओं ने भगवान श्री कृष्ण की आरती की कथा पोथी का पूजन किया तत्पश्चात जगद्गुरु कुलम् के छात्रों ने मंगल पाठ संपन्न किया।








