
बेमेतरा: गोमची स्थित माँ गोदावरी आनंदवन आश्रम में आज राष्ट्रीय संत राजीव नयन जी महाराज एवं भजन सम्राट पूज्य संजीव नयन जी महाराज का पावन आगमन हुआ। इस अवसर पर आश्रम ट्रस्ट के योगेश तिवारी ने संतों का आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किए आश्रम पहुंचने पर दोनों संतों ने आश्रम का भ्रमण कर यहां की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया तथा आश्रम में निवासरत बुजुर्ग माता-पिता से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना।
इस दौरान पूज्य संतों ने बुजुर्गों के बीच बैठकर उनसे आत्मीय संवाद किया, उनका हालचाल जाना तथा अपने प्रेरणादायी विचारों से सभी को आध्यात्मिक ऊर्जा एवं सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता एवं बुजुर्गों की सेवा से बढ़कर कोई पुण्य कार्य नहीं है। जिन परिवारों और समाज में बुजुर्गों का सम्मान होता है, वहां सदैव सुख, समृद्धि और ईश्वर की कृपा बनी रहती है।
इस अवसर पर पूज्य राष्ट्रीय संत राजीव नयन जी महाराज ने आश्रम ट्रस्ट के योगेश तिवारी की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में जब लोग अपने माता-पिता की सेवा करने से भी पीछे हट रहे हैं, ऐसे दौर में आप बुजुर्ग माता-पिता को परिवार की तरह आश्रय, सम्मान और स्नेह देकर अत्यंत पुण्य एवं प्रेरणादायी कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि माँ गोदावरी आनंदवन केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि उन बुजुर्गों के लिए एक स्नेहपूर्ण परिवार है, जहाँ उन्हें अपनापन, सम्मान और आत्मीय वातावरण प्राप्त हो रहा है। उन्होंने योगेश तिवारी से कहा कि “आप इसी प्रकार निस्वार्थ भाव से सेवा कार्य करते रहें, यह कार्य समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बुजुर्गों की सेवा ही सच्चे अर्थों में ईश्वर की सेवा है और ऐसे सेवा कार्य का पुण्य अत्यंत दुर्लभ होता है।” उन्होंने आश्रम परिवार के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए सभी सेवा कार्यों के लिए अपना आशीर्वाद प्रदान किया। भजन सम्राट श्री संजीव नयन जी महाराज ने अपने भजनों एवं प्रेरणादायी संदेशों के माध्यम से सभी को ईश्वर भक्ति, सेवा और सकारात्मक जीवन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भक्ति और सेवा एक-दूसरे के पूरक हैं तथा बुजुर्गों की सेवा करना ईश्वर की सच्ची आराधना है। इस अवसर पर आश्रम ट्रस्ट श्री योगेश तिवारी ने कहा कि माँ गोदावरी आनंदवन का उद्देश्य केवल बुजुर्गों को आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें परिवार जैसा स्नेह, सम्मान और अपनापन प्रदान करना है। आश्रम में उनके स्वास्थ्य, भोजन, मनोरंजन, आध्यात्मिक गतिविधियों एवं सम्मानपूर्ण जीवन के लिए निरंतर प्रयास किए जाते हैं। समय-समय पर धार्मिक, सांस्कृतिक, स्वास्थ्य एवं योग संबंधी कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है, जिससे बुजुर्गों का जीवन आनंदमय एवं सकारात्मक बना रहे। उन्होंने दोनों पूज्य संतों का आश्रम आगमन पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सान्निध्य एवं आशीर्वाद से आश्रम परिवार को नई ऊर्जा, प्रेरणा और सेवा कार्यों को आगे बढ़ाने का संबल मिला है। अंत में सभी बुजुर्गों ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे आश्रम परिसर में आध्यात्मिक वातावरण, भक्ति, सेवा, अपनापन और श्रद्धा का भाव देखने को मिला। संतों के आगमन से आश्रम में निवासरत बुजुर्गों के चेहरों पर विशेष प्रसन्नता और आत्मिक संतोष स्पष्ट दिखाई दिया।








