
रायपुर: बीमा कर्मियों के अखिल भारतीय संगठन ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्पलाईज एसोसिएशन का 76 वाँ स्थापना दिवस देश भर में धूमधाम से उत्सवित किया गया l इस क्रम में रायपुर डिवीजन इंश्योरेंस एम्पलाईज यूनियन के द्वारा रायपुर मंडल कार्यालय सहित समस्त 16 शाखा इकाईयों में प्रात: संगठन का ध्वज फहराकर कार्यक्रम का आरंभ किया l इसके पश्चात दिन भर सभाओं, समाज सापेक्ष कार्यों एवं अन्य विविध आयोजनों के साथ यह उत्सव जारी रहा l एल आई सी के मंडल कार्यालय में कर्मचारियों, अधिकारियों, अभिकर्ताओं, पेंशनर्स एवं ठेका कर्मियों की विशाल उपिस्थति के मध्य संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का. धर्मराज महापात्र ने आतिशबाजी एवं गगनभेदी नारों के साथ ध्वजारोहण किया l इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्ष 1951 में निजी बीमा कंपनियों में कठिन परिस्थितियों में कार्यरत बीमा कर्मचारियों ने इस संगठन का निर्माण किया था l इस संगठन ने जीवन बीमा के राष्ट्रीयकरण के संघर्ष को आरम्भ किया l इसके चलते 1956 में राष्ट्रीयकृत संस्थान के रूप में भारतीय जीवन बीमा निगम अस्तित्व में आई l अपने 75 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा में ए आई आई ई ए के नेतृत्व में बीमा कर्मियों ने संघर्ष, त्याग व प्रतिबद्धता के साथ राष्ट्रीयकृत बीमा उद्योग के अभूतपूर्व विकास में अपना योगदान देते हुए इसकी हिफाज़त की लड़ाई भी जारी रखी है l इसके पश्चात सभी साथियों ने संगठन की मजबूती एवं श्रमिक हितों की रक्षा हेतु शपथ ग्रहण की l इसके पश्चात 76 गुब्बारे उड़ाये गए l इस अवसर पर पूरे कार्यालय परिसर की आकर्षक सजावट की गई थी l सभी साथियों को मिठाइयां वितरित की गई तथा उपहार प्रदान किए गए l दोपहर को केक काटा गया एवं कार्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया गया l भोजनावकाश पर द्वार सभा को संबोधित करते हुए का. धर्मराज महापात्र ने कहा कि ए आई आई ई ए ने अपने अनुभव से यह दृढ़ विश्वास विकसित किया है कि प्रत्येक संघर्ष को उसके समय की राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों के संदर्भ में समझना आवश्यक है। इसी दृष्टिकोण ने संगठन को आने वाले खतरों को पहले से पहचानने तथा कर्मचारियों, सार्वजनिक क्षेत्र, अर्थव्यवस्था और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर समय रहते स्पष्ट और सही रुख अपनाने में सक्षम बनाया है।आज श्रमिक आंदोलन के सामने अनेक नई और जटिल चुनौतियाँ हैं। साम्राज्यवाद का बढ़ता प्रभाव, अधिनायकवादी प्रवृत्तियाँ, लोकतांत्रिक मूल्यों का कमजोर होना, तेज़ी से बदलती तकनीक, बढ़ता स्वचालन ,श्रम अधिकारों पर हमले, सामूहिक सौदेबाजी को कमजोर करने के प्रयास, बढ़ती आर्थिक असमानता, सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं पर आघात तथा समाज में विभाजनकारी शक्तियों का विस्तार—ये सभी श्रमिक आंदोलन के सामने गंभीर प्रश्न खड़े कर रहे है lबीमा उद्योग भी तीव्र परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। एल आई सी में सरकार की हिस्सेदारी और कम करने तथा सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के निजीकरण के प्रयास जारी हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की इन संस्थाओं की कार्यात्मक स्वायत्तता को भी लगातार कमजोर किया जा रहा है।कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद एल आई सी ने उल्लेखनीय प्रगति की है, फिर भी नई भर्ती की लगातार उपेक्षा की जा रही है।ऐसी परिस्थितियों में हमारा इतिहास हमें प्रेरणा और मार्गदर्शन देता है। बीमा कर्मी आंदोलन का इतिहास सिद्ध करता है कि जब कर्मचारी एकजुट, संगठित और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध रहते हैं, तब कठिन से कठिन चुनौतियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है।सार्वजनिक क्षेत्र,लोकतांत्रिक मूल्यों, धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के प्रति ए आई आई ई ए की अटूट प्रतिबद्धता ही भविष्य के संघर्षों का आधार बनी रहेगी। 75 वर्षों की समृद्ध विरासत ने संगठन को विशाल अनुभव, मजबूत संगठनात्मक शक्ति और स्पष्ट वैचारिक दिशा प्रदान की है। भविष्य की चुनौतियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, हमारा इतिहास हमें याद दिलाता है कि अतीत की प्रत्येक उपलब्धि सामूहिक प्रयास और दृढ़ संघर्ष से ही प्राप्त हुई है। यही भावना आगे भी हमारा मार्गदर्शन करेगी।उन्होंने आव्हान किया कि ए आई आई ई ए की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का उत्सव मनाते हुए हम उन आदर्शों, मूल्यों और सामूहिक भावना के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित करें, जिन्होंने हमारी गौरवशाली यात्रा को आकार दिया है, और नए संकल्प एवं आत्मविश्वास के साथ भविष्य की बड़ी सफलताओं की ओर आगे बढ़ें।
सभा को आर डी आई ई यू के महासचिव का. गजेन्द्र पटेल ने संबोधित करते हुए एल आई सी में सरकारी हिस्सेदारी को पुनः स्टॉक मार्केट के माध्यम से बेचे जाने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसके खिलाफ जारी संघर्ष को तेज करने पर जोर दिया।









