
रायपुर:कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, घने जंगलों से घिरा दुर्गम रास्ता और आधुनिक बुनियादी सुविधाओं से मीलों की दूरी—यह पहचान रही है छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर बसे अबूझमाड़ क्षेत्र की। लेकिन आज इसी अबूझमाड़ की एक पंचायत विकास की नई इबारत लिख रही है। महाराष्ट्र सीमा से सटी जिला मुख्यालय नारायणपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत पदमकोट में ‘जल जीवन मिशन’ ने न केवल हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और आजीविका की तस्वीर भी बदल कर रख दी है।
कभी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने वाला यह दूरस्थ वनांचल गांव आज सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति व्यवस्था के जरिए ग्रामीण विकास और समावेशी प्रगति का एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।
सौर ऊर्जा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का अनूठा संगम
अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी। बिजली की अनिश्चितता और कठिन रास्तों के बीच जल जीवन मिशन के अंतर्गत एक ऐसी कार्ययोजना तैयार की गई जो आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल हो।
गांव में निर्बाध पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी और बुनियादी ढांचे का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है। गांव के हर कोने और हर घर को जोड़ने के लिए करीब चार किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। बिजली पर निर्भरता खत्म करने के लिए 10-10 हजार लीटर क्षमता की चार सोलर पानी टंकियों का निर्माण किया गया है। इस पूरी व्यवस्था के माध्यम से पंचायत के शत-प्रतिशत परिवारों को उनके घर पर ही नियमित और स्वच्छ पेयजल मिल रहा है।










