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रायपुर :- पराम्बा भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी ललिता प्रेमाम्बा महारानी का 21 वां पाटोत्सव समारोह राजधानी के बोरिया कला स्थित शंकराचार्य आश्रम में यतिप्रवर 1008 दण्डी सन्यासी डॉ. इंदुभवानंद महाराज के मुख्य उपस्थिति में सानंद संपन्न हुआ।
भक्तों ने बोरियाकला स्थित शंकराचार्य आश्रम में बड़ी संख्या में शामिल होकर चावल, रोली, कुमकुम, मिष्ठान्न, ऋतुफल आम, सेब, चीकू, केला, आदि विभिन्न द्रव्यों से राजराजेश्वरी का अर्चन किया. यतिप्रवर 1008 दण्डी सन्यासी डॉ. इंदुभवानंद महाराज ने कहा पिछले चार दिनों से भगवती राजराजेश्वरी की शोभायात्रा का आज पाटोत्सव समारोह के साथ संपन्न हुआ.
यतिप्रवर 1008 दण्डी सन्यासी डॉ. इंदुभवानंद महाराज
ने कहा कि आज से 20 वर्ष पूर्व वैशाख शुक्ल सप्तमी पुष्य नक्षत्र योग में 2006 को ब्रह्मलीन जगदगुरुज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद जी ने अपने करकमलों से स्फटिक मणिमय भगवती राजराजेश्वरी का विग्रह स्थापित किया था तथा उनका नाम संस्कार करते हुए प्रेमाम्बा नाम दिया था.उन्होंने कहा साधक जिस प्रकार की मूर्ति में दर्शन पूजन करता है. वैसे ही सूत्र विकसित होते हैं . इसी भावना को ध्यान में रखते हुए नवनिर्मित छत्तीसगढ़ का चतुर्दिक अभ्युदय और वृद्धि हो, भौतिक विकास की वृद्धि हो इस उद्देश्य से स्फटिक मणिमय श्रीविग्रह की स्थापना की गई थी.यतिप्रवर 1008 दण्डी सन्यासी डॉ. इंदुभवानंद महाराज ने कहा जगदगुरु शंकराचार्य महाराज का यह अनुपम उपहार है, जिससे छत्तीसगढ़ वासियों का भौतिक एवं अध्यातमिक विकास भी हो.उन्होंने कहा सनातनी मंदिर परंपरा के अनुसार मंदिरों में दो तरह तरह की विग्रह स्थापित होती है चल एवं अचल मूर्ति।अचल मूर्ति का दर्शन मंदिर में जाने से होता है. किंतु चल मूर्ति वर्ष में एक दिन प्राण प्रतिष्ठा के दिन भ्रमण करते हुए अपने भक्तों को आशीर्वाद देती है इसे उत्सव मूर्ति भी कहा जाता है. जो प्राण प्रतिष्ठा के दिन बाहर आकर अपने भक्तों को दर्शन देती है.इस वर्ष पराम्बा भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी का रथ तात्या पारा वाले भूपेन्द्र शर्मा के निवासस्थान में विश्राम रहा, दूसरा विश्राम संतोषीनगर अलका मिश्रा, तीसरा विश्राम अनिल मयंका पाण्डेय बोरियकला में रहा, तदोपरांत भगवती राजराजेश्वरी आज अपने मूल स्थान शंकराचार्य आश्रम बोरिया कला में विराजमान हो गई.
समारोह में आचार्य धर्मेंद्र महाराज, महेन्द्र महाराज, दीपक पाण्डेय वैदिक, खिलेश्वर दुबे सहित वैदिक विद्वानों ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न कराया।इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तगण उपस्थित थे।













