रायपुर : “विविधता में एकता ही देश की असली ताकत है ।भारत देश विविधताओं का उत्सव है l ये उत्सव भाषाओं, रंगों, गीतों, परंपराओं, खान पान एवं वेशभूषाओं का उत्सव है । यदि ये विविधता समाप्त हुई तो भारत एक नहीं रह पायेगा । आज के दौर का दुर्भाग्य है कि मिथकों के आधार पर एक धर्म – एक भाषा -एक संस्कृति जैसी धारणाओं को थोपा जा रहा है इतिहास का विकृतिकरण जारी है । नेहरू – गांधी सहित स्वाधीनता आंदोलन के मुख्य नायकों को खलनायक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है l संस्कृति बहुवचन होती है और उसे एकवचन में ढाला नहीं जा सकता।हमारा देश ‘जन -गण – मन ‘ में प्रतिध्वनित होता है । हमारी स्मृतियां मिल जुलकर रहने और मोहब्बत करने की व्यापक मानवीय सरोकारों के साथ जुड़ी हुई है । इसी मानवीय सरोकारों पर सुनियोजित रूप से आक्रमण जारी है । नेहरू जी ने आध्यात्मिक अवधारणा के स्थान पर वैज्ञानिक चेतना को स्थान दिया । महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा व मानवीय करुणा को स्थापित किया । यही कारण है कि ये दोनों महानायक सर्वाधिक हमलों की जद में है । भारत की विविधता हमारी सबसे बड़ी संपत्ति है और दुनिया की कोई ताकत इसे नष्ट नहीं कर सकती ।आज हमें सड़कों पर अहिंसक रूप से उतरकर तमाम प्रतिगामी हमलों का मुकाबला करना होगा । मुहब्बत हमारे स्वतंत्रता संग्राम की बहुमूल्य विरासत है ।देश का शासन संविधान के आधार पर चलाया जाना चाहिए ।संविधान की रक्षा का संघर्ष हमारा महत्वपूर्ण दायित्व है ।अनेकता में एकता की मूल भावना को बचाए रखने के संघर्ष को आगे बढाकर ही देश का भविष्य सुरक्षित रख सकते है ।” उक्त विचार बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो. आर के मंडल द्वारा व्यक्त किए गए । प्रो. मंडल रायपुर डिवीजन इंश्योरेन्स एम्पलाइज यूनियन द्वारा आयोजित एक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे ।” विविधता में एकता ही हमारी ताकत है ” विषय पर संपन्न यह सेमिनार बीमाकर्मियो के राष्ट्रीय संगठन आल इंडिया इंश्योरेंस एम्पलाइज एसोसिएशन के प्लेटिनम जुबली वर्ष पर देश भर में जारी कार्यक्रमों की श्रृंखला में आयोजित किया गया था ।
इस सेमिनार में विषय का प्रतिपादन करते हुए सेंट्रल जोन इंश्योरेन्स एम्पलाइज एसोसिएशन के महासचिव धर्मराज महापात्र ने कहा कि भारत या इंडिया की अवधारणा का मूल आधार ही विविधता में एकता की भावना है ।आज हमारी यह मिली -जुली संस्कृति ही निशाने पर है l हमारे समाज सुधारकों की महान मानवीय परंपरा खतरे में है। यह लड़ाई वैचारिक है । जो कुछ घटित हो रहा है उसका मुकाबला विचारधारात्मक रूप से ही संभव है । इस लड़ाई के माध्यम से ही देश व समाज का भविष्य बेहतर बनाया जा सकता है ।
सेमिनार की अध्यक्षता आर डी आई ई यू के अध्यक्ष राजेश पराते द्वारा की गई । सेमिनार में बड़ी संख्या में बीमाकर्मियो के साथ शहर के ट्रेड यूनियन आंदोलन के कार्यकर्ता तथा प्रमुख बुद्धिजीवी उपस्थित थे l प्रो. मंडल के वक्तव्य के पश्चात प्रश्नोत्तर का एक सत्र भी संपन्न हुआ ।इसमें प्रतिभागियों द्वारा उठाएं गए सवालों का जवाब प्रो. मंडल द्वारा दिया गया। आर डी आई ई यू के महासचिव का. सुरेन्द्र शर्मा द्वारा प्रस्तुत आभार प्रदर्शन के साथ सेमिनार समाप्त हुआ ।








