जगदलपुर:बस्तर जिले के सुदूर वनांचल में बसे क्षेत्र चांदामेटा, मुण्डागढ़, छिन्दगुर और तुलसी डोंगरी जो कभी नक्सल गतिविधियों के गढ़ माने जाते थे, अब विकास और शांति का नया अध्याय लिख रहे हैं। जिन पहाड़ियों और जंगलों में कभी नक्सलियों की ट्रेनिंग हुआ करती थी, वहीं आज वन विभाग स्थानीय युवाओं को वानिकी कार्यों का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार उपलब्ध करा रहा है।
इन इलाकों में लंबे समय तक नक्सलियों के प्रभाव तथा उनसे जुड़े लोगों द्वारा कानूनों की गलत व्याख्या ने ग्रामीणों को विकास की मुख्यधारा से दूर रखा। शासन के प्रति अविश्वास का वातावरण बना दिया गया। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। ग्रामीणों ने इन तत्वों की वास्तविक मंशा को समझ लिया है और अब वे दूसरों की लड़ाई में अपना समय और भविष्य गंवाने को तैयार नहीं हैं। वन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा लगातार किए जा रहे संवाद, जागरूकता और विश्वास निर्माण ने ग्रामीणों का नजरिया बदला है।








