रायपुर:शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के क्रम को गति देते हुए डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने श्रीमद् भागवत के प्रसंग में बताया कि भगवान गोद में तो भय,बाधा किस बात की? वसुदेव जी ने शिशुभावापन्न श्री कृष्ण को गोद में लिया, सारे बंधन टूट गए, ताले खुल गए, कपट ने मार्ग दिया, द्वारपाल सो गए, मथुरा वासी गहरीनिद्रा में मग्न भगवान की विमुखजन मोहनी माया ने सबको सुला दिया वसुदेव की गोद में बैठकर भगवान गोकुल के लिए चल पड़े। यमुना जी में बाढ़ आई थी, भगवान को गोद में देख यमुना जीने मार्ग दे दिया भगवान जिसके हृदय में अथवा गोद में विराजमान हो जाएं तो उसको किस बात का भय? भगवान भयके भी भय है। उन्होंने कहा भय भी उनसे भयभीत होता है। वसुदेव जी ने भगवान को गोकुल में विराजमान कर दिया। गोकुल अर्थात इंद्रियों का समूह। अभी तक भगवान ज्ञान ध्यान से प्राप्त होते थे किंतु वसुदेव जी की कृपा से अब भगवान इंद्रियों के समूह गोकुल में सुलभ हो गए अर्थात गन्ध, रस रूप, स्पर्श एवं शब्द के द्वारा जीवौं के हृदय में प्रवेश कर रहे हैं। यह भगवान की भक्त वत्सलता है। कथा के पूर्व समस्त यजमानों ने पुराण पुरुषोत्तम भगवान की पोथी का पूजन किया तथा आरती संपन्न की।

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