रायपुर: शंकराचार्य आश्रम बोरिया कला रायपुर में चल रहे चातुर्मास क्रम को गति देते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉक्टर स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ जी महाराज ने बताया कि भगवान सत्य के भी सत्य हैं परमात्मा की प्राप्ति का साधन भी सत्य ही है। श्रीमद्भागवत कृष्ण जन्म के प्रसंग की दिव्य अमृतमयी कथा के प्रसंग में गर्भस्थ भगवान की स्तुति करते हुए देवगण कह रहे हैं प्रभु आपकी प्रतिज्ञा आपका संकल्प सत्य होता है तथा आपकी प्राप्ति का साधन भी सत्य है आप त्रिसत्य हैं अर्थात भूत भविष्य वर्तमान तीनों काल में आप सत्य हैं। पंचभूत भी आपका सत्य स्वरूप है तथा आप सत्य के भी सत्य हैं अर्थात आप पारमार्थिक सत्य हैं। वैसे तो गर्भवास महा दुख माना जाता है किंतु भगवान जब स्वयं गर्भ में आ जाते हैं तो ब्रह्मा विष्णु आदि देवता भी गर्भ की स्तुति करने लगते हैं। यह सोचकर की गर्भवास का दुख देख कर भगवान लौट ना जाएं। आगे देवताओं ने कहा कि यह संसार आदि वृक्ष है माया इसका आश्रय है।
आपके चरण कमल संसार सागर के लिए नौका के समान हैं जिनका आश्रय लेकर आपके भक्त भवसागर को पार हो जाते है। चराचर लोग के कल्याण के लिए सत्व गुण का आश्रय लेकर के आप अवतार धारण करते है।
कथा के पूर्व श्री शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वानों ने कथा के यजमान भारत भूषण शर्मा एवं उनके परिवार से भागवत भगवान की पोथी का पूजन कराकर आरती संपन्न कराई।

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