रायपुर:शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला में चल रहे चातुर्मास प्रवचन माला के अंतर्गत शिव पुराण कथा का विस्तार करते हुए शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी डॉ स्वामी इन्दुभवानन्द तीर्थ महाराज ने कहा कि आत्मा में रमण करने वाले व्यक्ति को विषय वासना प्रभावित नहीं कर सकती है। भगवान शिव आत्माराम है, सारे विश्व प्रपंच को अपनी आत्मा में देखते हैं, और अपने आप को सारे विश्व प्रपंच में समाहित रखते हैं अतः उन्हें साक्षी और सर्वात्मा कहा जाता है।उन्होंने कहा वे संग्रह परिग्रह से भी दूर है तथा सदा सर्वदा अपने भक्तों को दान करते रहते अतःवे अवढरदानी भी माने जाते हैं।
उनके परिवार में एक बूढ़ा बैल खटिया का पावा, फरसा, चर्म, भस्म सर्प, कपाल बस इतनी ही परिवार पालन की सामग्री है फिर भी भगवान शिव का वैलक्षण्य विचित्र है इंन्द्रादि देवता भी भगवान शिव की कृपा कटाक्ष से अतुलनीय समृद्धि एवं भोगों को प्राप्त हो चुके हैं किंतु आपके पास भोग की कोई भी वस्तु नहीं है, क्योंकि विषय वासना रूपी मृगतृष्णा स्वरूपभूत चैतन्य आत्माराम में रमण करने वाले को भ्रमित नहीं कर पाती है। इसी कारण से आप जगदीश्वर कहे जाते हैं।
उक्त बातें शिव पुराण कथा में ब्रह्मा जी एवं विष्णु जी ने सती विवाह के प्रस्ताव को प्रस्तुत कर स्तुति करते हुए भगवान शिव से अभिव्यक्त की।देवताओं ने आगे कहा कि जन्म आदि विकार आप में नहीं रहते हैं आप जन्म और कर्म से परे हैं देवता ऋषि और सिद्ध महात्मा भी आपके पद को नहीं जानते हैं तो फिर अन्य प्राणी आपको कैसे जान सकता है। आप प्रसन्न हो जाइए तथा हमारे प्रस्ताव को स्वीकार कर देवताओं को तथा जन सामान्य को अभय प्रदान कीजिए।
कथा के पूर्व यजमान पुहुपराम साहू, मनोरमा साहू युवराज साहू नरेश साहू देवेंद्र साहू एवं उनके परिवार ने तथा शंकराचार्य आश्रम के वैदिक विद्वानों ने मिलकर भगवान शंकर की आरती एवं अभिषेक संपन्न किया तत्पश्चात स्वामी जी महाराज ने भगवान शिव की कथा सुनाई।

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